'साबित करो कि तुम भारतीय हो', बांग्लादेशी करार दिए गए व्यक्ति से कलकत्ता हाई कोर्ट ने मांगे सबूत
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुर्शिदाबाद की एक महिला की याचिका खारिज कर दी, जिसमें पति को बांग्लादेशी करार दिए जाने ...और पढ़ें
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुर्शिदाबाद की महिला की याचिका खारिज की (फाइल फोटो)
HighLights
कलकत्ता हाई कोर्ट ने निर्वासन रोकने की याचिका खारिज की।
कोर्ट ने व्यक्ति को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने को कहा।
पुलिस के पास व्यक्ति के अवैध बांग्लादेशी होने के सबूत।
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। मुर्शिदाबाद की एक महिला के पति का नाम सस्पेक्टेड इमीग्रेंट रजिस्टर से हटा दिया गया था और उसे बांग्लादेश करार दिया गया था।
महिला इस मामले को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची। महिला अपने पति को देश से बाहर भेजे जाने (डिपॉर्टेशन) से रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग कर रही थी।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को मुर्शिदाबाद की इस महिला की याचिका खारिज कर दी है। हाई कोर्ट ने महिला के पति से कहा, 'साबित करें कि आप भारतीय हैं।'
बंगाल पुलिस के पास सबूत
मुर्शिदाबाद की नरगिस बीबी नाम की महिला ने जस्टिस कृष्णा राव की सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी, क्योंकि उनके पति सेलिम शेख को 31 अगस्त से डिटेंशन कैंप में रखा गया है।
इस मामले में ये बात भी सामने आई है कि नरगिस बीबी का नाम तो 2002 और 2026 की वोटर लिस्ट में था, लेकिन सेलिम का नाम दोनों में से किसी में भी नहीं था।
बंगाल पुलिस के वकील ने बताया कि 31 अगस्त को हुई छापामारी में ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि सेलिम एक अवैध बांग्लादेशी है।
वकील ने आगे बताया कि सेलिम को अवैध प्रवासियों की खोज, पहचान और देश से बाहर भेजने के लिए MHA (गृह मंत्रालय) के मई 2026 के नोटिफिकेशन के तहत हिरासत में लिया गया है।
हाई कोर्ट ने नागरिकता साबित करने के लिए कहा
नरगिस के वकील ने हिरासत को गैर-कानूनी बताया और कहा कि सेलिम को किसी भी अधिकारी के सामने पेश नहीं किया गया है।
जस्टिस राव ने पूछा कि 'किस तरह का मौका दिया जाना चाहिए। कानून के मुताबिक, 30 दिनों की जांच चल रही है। अगर आप कोर्ट या अधिकारी को यह साबित नहीं कर पाते कि आप भारतीय नागरिक हैं, तो अधिकारी क्या करेगा?'
जस्टिस राव ने आगे कहा, 'क्या वह आपको भारतीय इलाके में घूमने देगा? आपसे एक दस्तावेज मांगा गया है। मुझे वह दस्तावेज दिखाएं जिससे पता चले कि आपका नाम 2002 की वोटर लिस्ट में था।'
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