सुंदरगढ़, जेएनएन। लॉकडाउन के हालात में गरीब, मज़दूर, दिहाड़ी कामगार, फुटपाथ पर छोटी मोटी चीजें बेचने वाले, दुकानों में काम करनेवाले अपना रोज़गार गंवा बैठेंगे। इतने लम्बी अवधि तक रोजगार न मिला, तो वो खाएंगे क्या? भूखों मरने की नौबत आ जाएगी उनके परिवार की। सरकार के पास उनके लिए कोई योजना है? 

लॉक डाउन शुरू होने के तुरंत बाद मीडिया, सोशल मीडिया में यह चर्चा शुरू हो गई थी। लोग आपस में कोरोना वायरस, उससे जुडी सच्ची-झूठी बातों, सरकार के लॉक डाउन के फैसले के भले बुरे पहलुओं के साथ साथ इस समस्या पर भी चर्चा करते देखे, सुने गए। कभी सरकार से मांग की गई कि इस दिशा में कुछ कदम उठाए जाए, तो कभी समाजसेवी संस्थाओं से आशा की गई कि वो मदद को आगे आएं। पर इन चर्चाओं से परे, एक शख्स सुंदरगढ़ सदर मस्जिद से मगरिब (सूर्यास्त) की नमाज पढ़कर बाहर निकलता है। पास की राशन दुकान वाले से एक सामान्य परिवार के एक महीने का राशन, जिसमे चावल, आटा, दाल, तेल, शक्कर, चाय पत्ती , आलू, प्याज़, नहाने व कपडे धोने के साबुन आदि शामिल हैं, के कुछ पुलंदे बंधवाता है। फिर अपने कमचारियों के द्वारा पास पड़ोस के कुछ गरीब परिवारों को भिजवा देता है। इस सन्देश के साथ, कि भोजन की तलाश में घर से बाहर मत निकलना। 

25 मार्च की वो शाम मंसूब आलम (काल्पनिक नाम) की आंखों को नम कर देती हैं। जब सबसे मदद मांग कर वह निराश हो गया था। पत्नी और दो बच्चों का उसका छोटा परिवार है। लॉक डाउन के चलते उनका सिलाई का काम बंद हो गया था। 21 दिनों की इस बंदी में उसके परिवार का भूखों मरना लगभग तय था। पति पत्नी की आंखों में नींद नहीं थी। ऐसे में उस नेक शख्स ने उसके घर एक महीने का राशन भेज दिया था। उसके अलावा उसके मोहल्ले के और भी कई परिवारों को उस मददगार ने राशन भिजवाया था।

पत्रापड़ा निवासी जोगेश साहू और उसकी पत्नी एक दुकान में काम करते थे। लॉक डाउन के चलते दुकान बंद हुई, तो मालिक उन्हें पारिश्रमिक कहाँ से देता? उनके पास जो पैसे थे, वह एकाध हफ्ते चलने के लिए काफी थे। पर उसके बाद वह क्या खाएंगे, पति पत्नी इसी चिंता में थे। पर शुक्रवार की शाम, जब उनके घर में चावल के  सिवा कुछ नहीं बचा था, उसी मददगार ने राशन की पोटली उनके घर भिजवा दी। जोगेश कहते हैं- उस मददगार ने हमें इतना राशन दिया है, जिससे हमारा परिवार एक महीने आराम से चल सकता है। भगवान उन्हें लम्बी आयु दे। 

अच्छी खबर की तलाश में कुछ मीडिया प्रतिनिधि उस मददगार के घर पहुंचे, तो देखा, राशन के थैले बंधे पड़े हुए हैं, जो वह जरुरतमंदों को भिजवा रहे हैं। उनके एक कर्मचारी ने बताया कि अब तक सुंदरगढ़ शहर में 50 से अधिक लोगों को राशन दिया गया है, जबकि बडगांव, राजगांगपुर, राउरकेला समेत जिले भर में 2 सौ से अधिक लोगों की इसी प्रकार मदद की गई है। सरकार, समाजसेवी संस्थाओं का इंतज़ार किए बिना खुद आगे बढ़कर मदद करनेवाले मददगार ने कहा कि भूख इंतजार नहीं कर सकती। इसलिए मैंने फैसला किया, कि मुझसे जितना हो सकेगा, मैं जरुरतमंदों की मदद करुंगा। मैं कोई आर्थिक या और किसी प्रकार की सहायता नहीं दे सकता। पर इतनी मेरी कोशिश होगी कि इस संकट के समय में कोई भूख से न मरे। न ही खाने की तलाश में बाहर निकल कर संक्रमण का शिकार हो जाए। उन्होंने कहा कि यह संकट सारे देशवासियों पर है, इसलिए हमें मिलकर इसका मुकाबला करना होगा, एक दूसरे का साथ देना होगा, तभी हम यह जंग जीत सकते हैं।

इस मददगार ने किसी भी सूरत में अपना नाम या तस्वीर छपवाने से इंकार कर दिया। कहा, इससे उन लोगो को बुरा लग सकता है, जिनकी मैंने मदद की है। मैंने अखबारों में नाम या फोटो छपवाने को यह नहीं किया, इन्सानियत के नाते किया है। सिर्फ मैं ही क्यों, देश में बहुत सारे लोग, कई संस्थाएं सेवा कर रही हैं। उनके बारे में छापें, तो और भी लोगों को प्रेरणा मिलेगी मदद का हाथ बढ़ने की।

बीजू छात्र जनता दल ने दी 20 हज़ार की सहायता राशि    

बीजू छात्र जनता दल पश्चिमांचल जोन अध्यक्ष बैकुंठ कुमार नायक ने सदर उपजिलापाल अभिमन्यु बेहेरा से मिलकर दल की तरफ से कोरोना वायरस से लड़ाई के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में 20 हज़ार का दान दिया। श्री नायक के साथ मुकेश पुरोहित, शिवाजी नाएक, सुब्रत नाएक, रवि जायसवाल, विस्मय पटनायक ने उपजिलापाल को डिमांड ड्राफ्ट देने के साथ साथ सुंदरगढ़ की जनता से अनुरोध किया कि खुद सुरक्षित रहें, पाने परिजनों, समाज व शहरवासियों को सुरक्षित रखें। लॉक डाउन का सम्मान करते हुए घर से बाहर न निकलें।

Posted By: Vijay Kumar

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