नई दिल्ली। कोयला ब्लॉक आवंटन पर कैग की रिपोर्ट पर पैदा हुए बवंडर के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय [पीएमओ] खनन शुरू नहीं कर पाने वाली कंपनियों को आवंटित ब्लॉक रद नहीं करने पर कोयला मंत्रालय से खफा है। पीएमओ ने 6 सितंबर तक इस मामले को निपटाने का निर्देश दिया है। सोमवार को हुई अंतर-मंत्रालयी बैठक के बाद पीएमओ ने कोयला मंत्रालय को यह संदेश दिया है।

यह बैठक टाटा पावर, रिलायंस पावर और आर्सेलर-मित्तल जैसी निजी कंपनियों को आवंटित 25 ब्लॉकों के साथ कुल 58 ब्लॉक का भविष्य तय करने के लिए बुलाई गई थी। सूत्रों के मुताबिक, 27 अगस्त को पीएमओ ने कोयला मंत्रालय से कार्रवाई नहीं करने को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर दी थी। अप्रैल में सरकार ने उन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने शुरू कर दिए थे, जिन्होंने निर्धारित समय में आवंटित ब्लॉकों के विकास का काम शुरू नहीं किया था। जून में अतिरिक्त कोयला सचिव जोहरा चटर्जी की अध्यक्षता में कोयला ब्लॉकों के इस्तेमाल की प्रगति की समीक्षा के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह [आइएमजी] का गठन कर दिया गया था।

पीएमओ ने आइएमजी से ब्लॉक आवंटन रद करने की सिफारिश के सभी विशेष कारण बताने के लिए कहा है। साथ ही समूह को 15 सितंबर तक इस मामले में पूरी कसरत करने का भी निर्देश दिया है। कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक 58 ब्लॉकों में कई कैग की रिपोर्ट में शामिल हैं। माना जा रहा है कि आइएमजी निजी कंपनियों को सौंपे गए कारण बताओ नोटिस के जवाब के आधार पर कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करेगी।

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