नई दिल्ली, एएनआइ। 'मानव जब जोर लगाता है, पत्‍थर भी पानी बन जाता है', कवि रामधारी सिंह दिनकर रचित 'रश्मिरथी' की पंक्तियां पढ़  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि महामारी कोविड-19 के लिए वैक्सीन लाने की राह कितनी  कठिनाईयों से भरी थी  जिसे हमारे वैज्ञानिक और वैक्सीन के रिसर्च से जुड़े लोगों के प्रयासों ने आसान और सरल बना दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को कोविड-19 वैक्सीनेशन ड्राइव का शुभारंभ कर दिया। इस मौके पर उन्होंने देशवासियों को संबोधित करते हुए शुभकामनाएं दी और कहा कि हर कोई यही सवाल कर रहा था कि वैक्सीन कब आएगा। यह अब आ गया है। 

प्रधानमंत्री द्वारा वैक्सीनेशन ड्राइव के शुभारंभ के अवसर पर पढ़ी गई ये जोशीली पंक्तियां कवि दिनकर रचित रश्मिरथी से ली गई - 'है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में?

खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पांव उखड़।

मानव जब जोर लगाता है,

पत्थर पानी बन जाता है।'

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज वो वैज्ञानिक, वैक्सीन रिसर्च से जुड़े अनेकों लोग विशेष प्रशंसा के हकदार हैं, जो बीते कई महीनों से कोरोना के खिलाफ वैक्सीन बनाने में जुटे थे। आमतौर पर एक वैक्सीन बनाने में बरसों लग जाते हैं। लेकिन इतने कम समय में एक नहीं, दो मेड इन इंडिया वैक्सीन तैयार हुई हैं।' 

प्रधानमंत्री ने कहा, ' मैं ये बात फिर याद दिलाना चाहता हूं कि कोरोना वैक्सीन की 2 डोज लगनी बहुत जरूरी है। पहली और दूसरी डोज के बीच, लगभग एक महीने का अंतराल भी रखा जाएगा। दूसरी डोज़ लगने के 2 हफ्ते बाद ही आपके शरीर में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक इम्यूनिटी विकसित हो पाएगी।'  

कवि रामधारी सिंह दिनकर जी के साथ ही उन्होंने तेलुगु कवि द्वारा रचित कविताओं की पंक्तियों का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,'इतिहास में इस प्रकार का और इतने बड़े स्तर का टीकाकरण अभियान पहले कभी नहीं चलाया गया है। दुनिया के 100 से भी ज्यादा ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या 3 करोड़ से कम है और भारत वैक्सीनेशन के अपने पहले चरण में ही 3 करोड़ लोगों का टीकाकरण कर रहा है।' 

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