जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कूटनीति में एक पुराना सिद्धांत है, जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ रही हो, तो सबसे पहले अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करो। क्या भारत भी कुछ ऐसी ही अनिश्चितताओं को देख रहा है? तभी उसने अपनी ऊर्जा कूटनीति पर सबसे ज्यादा तवज्जो देना शुरू कर दिया है। खाड़ी क्षेत्र के पांच देशों के दौरे पर गये पीएम नरेंद्र मोदी की यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा एक अहम एजेंडा था। अब अगले कुछ हफ्तों के दौरान अमेरिका के ऊर्जा सचिव रिक पेरी, ईरान के राष्ट्रपति रोहानी और सउदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी सउदी अरामको के मुखिया भारत के दौरे पर आ रहे हैं। इन तीनों के साथ होने वाली बातचीत सीधे तौर पर देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी हुई होगी।

पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक, ''अभी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अगला कुछ हफ्ता काफी व्यस्त रहेगा। ईरान के राष्ट्रपति के साथ फरजान-बी ब्लाक, गैस पाइपलाइन समेत सभी मुद्दों पर बात होगी। उसी तरह से अमेरिका के ऊर्जा सचिव के साथ काफी व्यापक एजेंडा है।'' प्रधान का कहना है कि पीएम मोदी के दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ व्यक्तिगत रिश्तों का असर भी ऊर्जा क्षेत्र पर दिख रहा है। मसलन, दो दिन पहले अबूधाबी नेशनल आयल कंपनी के तेल ब्लाक में 10 फीसद हिस्सेदारी को लेकर जो समझौता हुआ है वह मोदी और क्राउन प्रिंस मोहम्मद अल नेहयान के बीच प्रगाढ़ होते रिश्तों का ही परिणाम है। अभी तक भारतीय कंपनियों को खाड़ी के किसी भी देश के तेल ब्लाक में हिस्सेदारी नहीं मिली थी।

पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी के साथ होने वाली बातचीत से उम्मीद की जानी चाहिए हाल के वर्षों में तेल व गैस क्षेत्र में आपसी रिश्तों में जो तनाव पैदा हुआ है वह खत्म हो जाएगा। भारत ने पिछले वर्ष ईरान से तेल खरीदने में काफी कटौती कर थी। इस पर ईरान ने ऐतराज जताते हुए भारतीय तेल कंपनी ओएनजीसी को फरजाद स्थित गैस ब्लाक में हिस्सेदारी देने की प्रक्रिया सुस्त कर दी है। अब माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच कुछ बीच का रास्ता निकल आया है तभी ईरान के राष्ट्रपति भारत की यात्रा पर आने को तैयार हुए हैं। भारतीय तेल कंपनियों ने इस बात के संकेत भी दिए हैं कि वे ईरान से ज्यादा तेल खरीदने को तैयार हैं। ऐसे में फरजाद-बी गैस ब्लाक में भारतीय निवेश को भी हरी झंडी मिलने के संकेत है। रोहानी गुरुवार को दो दिवसीय दौरे पर भारत आएंगे।

भारत के लिए अमेरिकी ऊर्जा सचिव की आगामी यात्रा भी बेहद अहम होगी। ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल में दोनो देशों के बीच अभी ऊर्जा सहयोग को लेकर अभी कोई व्यापक विमर्श नहीं हुआ है, जबकि ओबामा प्रशासन के दौरान दोनों देशों ने इस क्षेत्र के लिए भारी भरकम एजेंडा बनाया था। हालांकि इस दौरान भारत ने अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऊर्जा की खरीद शुरु कर दी है। सचिव रिक पेरी की यात्रा के दौरान कोयला, आण्विक और हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में परस्पर सहयोग पर बात होगी।

 

By Tilak Raj