विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

एक फ्रेम में पीएम मोदी-पेजेश्कियान और पुतिन, ट्रंप क्यों होंगे बेचैन? फोटो में छिपा है बड़ा मैसेज

By Jayaprakash RanjanEdited By: Shubham Tiwari
Published: Fri, 11 Sep 2026 10:40 PM (IST)Updated: Fri, 11 Sep 2026 10:50 PM (IST)

पीएम मोदी ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम में वैश्विक व्यापार बढ़ाने के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया।

एक ही फ्रेम में पीएम मोदी, पुतिन, पेजेश्कियन (फोटो- PTI)

एक ही फ्रेम में पीएम मोदी, पुतिन, पेजेश्कियन (फोटो- PTI)

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। जब अमेरिका की टैरिफ नीति और पश्चिम एशिया संघर्ष से वैश्विक अर्थव्यवस्था डांवांडोल है, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों से कहा कि वे दस सबसे बड़ी कारोबारी बाधाओं को चिन्हित करें और उन्हें दूर करें।

ब्रिक्स बिजनेस फोरम में उन्होंने दो टूक कहा कि वैश्विक व्यापार तभी बढ़ेगा जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, आपूर्ति मार्ग खुले हों और नाविक सुरक्षित हों। भारत नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का दृढ़ समर्थक है।

यह बात उन्होंने ब्रिक्स के उस मंच से कही जहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन भी मौजूद थे। पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका तनाव और काला सागर में रूस-यूक्रेन युद्ध से ऊर्जा, उर्वरक और खाद्यान्न आपूर्ति प्रभावित हुई है। इन इलाकों में हमलों में कई भारतीय नाविकों की मौत भी हुई है।

1. अमेरिका व पश्चिमी देशों के आंखों में खटकने वाले रूस व ईरान के राष्ट्रपतियों के साथ मंच साझा कर मोदी ने यह संदेश दिया कि भारत अपनी कूटनीति और आर्थिक नीति खुद तय करेगा।

2. मंच पर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरिल रामफोसा व ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा भी मौजूद थे। नाम लिए बिना पुतिन और पेजेश्कियन ने पश्चिमी दबाव वाली व्यवस्था पर निशाना साधा।

3. पेजेश्कियन ने ब्रिक्स में स्थानीय मुद्रा का चलन बढ़ाने की जोरदार मांग की, ताकि कोई देश दूसरे के वित्तीय कामकाज पर प्रतिबंध न लगा सके। पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स दुनिया की जीडीपी में 40 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि जी-7 सिर्फ 29 प्रतिशत। उन्होंने व्यंग्य किया, “पता नहीं इसे जी-7 क्यों कहा जाता है।”

4. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में व्यापारिक बाधाएं बढ़ती जा रही हैं, भारत पुल बना रहा है। 2014 के बाद भारत ने करीब 40 देशों से मुक्त व्यापार समझौते हुए हैं। ब्रिक्स में भी भारत का रुख यही है, बाधाएं घटाओ, कारोबार बढ़ाओ।

उन्होंने याद दिलाया कि 2006 में समूह में चार देश थे, आज साझेदारों सहित यह परिवार 21 देशों का है। ये देश विश्व की आधी आबादी, 40 फीसद जीडीपी और 25 फीसद से अधिक व्यापार समेटे हुए हैं। जहां वैश्विक जीडीपी ढाई गुना हुई, ब्रिक्स की संयुक्त जीडीपी साढ़े चार गुना हो गई।

5. मोदी ने बिजनेस फोरम से तीन काम करने को कहा, ब्रिक्स के बीच शीर्ष दस व्यापार बाधाओं की पहचान कर उनकी रिपोर्ट तैयार करना, हर साल सौ स्टार्टअप को दूसरे ब्रिक्स बाजारों तक पहुंचाना और एक हजार नई कारोबारी साझेदारी स्थापितकरना। इसकी हर साल समीक्षा की बात भी उन्होंने कही।

6. पीएम मोदी ने कहा कि, “ब्रिक्स आगे बढ़े, दुनिया को भी आगे बढ़ाए।” इसके पहले राष्ट्रपति पुतिन ने व्यापार, ढांचा, लॉजिस्टिक्स और तकनीक के लिए नई निवेश मंच का प्रस्ताव रखा। उन्होंने आर्कटिक और उत्तर-दक्षिण गलियारे समेत सहयोग की बात कही। जोर देकर कहा, “हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। हम अपने हितों के पक्ष में हैं।”

7. उनके मुताबिक पिछले पांच वर्षों में वैश्विक आर्थिक वृद्धि का आधा से अधिक हिस्सा ब्रिक्स से आया। दुनिया बदल रही है। बीसवीं सदी के पुराने केंद्रों की जगह नए इंजन आ रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि रूस ब्रिक्स के विस्तार के प्रस्ताव को समर्थन देगा। उनके भाषण से साफ है कि भारत के साथ ही रूस भी ब्रिक्स को एक आर्थिक सहयोग संगठन के तौर पर आगे विकसित करने का हिमायती है। हालांकि यहीं बात ईरान के राष्ट्रपति ने भी कही।

8. ईरानी राष्टर्पति का कहना है कि मौजूदा वित्तीय व्यवस्था कुछ मुद्राओं पर टिकी है, इसलिए दुनिया राजनीतिक झटकों के आगे कमजोर जाती है। एक देश पर प्रतिबंध का असर व्यापक होता है। उन्होंने कहा कि, “सबसे जरूरी कदम है सदस्यों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाना।”

9. ईरान की भौगोलिक स्थिति और ऊर्जा भंडार को ब्रिक्स की आपूर्ति श्रृंखला के पुल के रूप में पेश करते हुए न्यू डेवलपमेंट बैंक को स्थानीय मुद्रा में कर्ज और गारंटी देऐ की माागं रखी।

10. ईरान ने 10 अरब डालर पूंजी वाली ब्रिक्स संयुक्त पुनर्बीमा कंपनी का प्रस्ताव भी रखा, ताकि बड़े ऊर्जा और इन्फ्रा प्रोजेक्ट का जोखिम समूह खुद उठा सके। उनका कहा कि, ‘ ऐसी व्यवस्था बने जिसमें कोई देश दूसरे का वैध व्यापार रोक न सके।’

यह भी पढ़ें- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपने डीप-टेक इनोवेशन की भारत कर रहा ब्रांडिंग, लगाई प्रदर्शनी