नई दिल्ली, ब्यूरो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आजादी के बाद से खाद्य भंडार तो भरते रहे, लेकिन भुखमरी और कुपोषषण में कमी नहीं आई। डिलिवरी सिस्टम की खामियां इसकी मूल वजह थी। वषर्ष 2014 के बाद स्थिति बदली और सदी की सबसे ब़़डी आपदा में भी कोई भूखा नहीं रहा। देश के 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। यह योजना दिवाली तक लागू रहेगी। इस पर तकरीबन दो लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गरीबों का सशक्तीकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शुरू होने के बाद लाभार्थी उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में लगभग दोगुना राशन मिल रहा है।

मोदी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाइ) के गुजरात के लाभार्थियों से बातचीत करने बाद खाद्य प्रबंधन की खामियों का जिक्र करते हुए कहा कि सालों साल से गोदामों में अनाज का स्टाक ब़़ढता रहा, लेकिन उस अनुपात में भुखमरी और कुपोषषण में कमी नहीं आई। आजादी के बाद सभी सरकारें गरीबों को सस्ता भोजन देने की बात कहती रहीं, इसके लिए चलाई गई योजनाओं का दायरा और बजट साल दर साल ब़़ढता गया। लेकिन अपेक्षित प्रभाव नहीं हुआ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वषर्ष 2014 के बाद नई तकनीक का उपयोग करके करोड़ों फर्जी लाभार्थियों को राशन प्रणाली से बाहर कर दिया गया। राशन कार्डो को आधार नंबर से जोड़ दिया गया, जिससे फर्जीवाड़ा रोकने में मदद मिली है। खाद्य सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए देश के 33 राज्यों व केंद्र शासित क्षेत्रों में वन नेशन--वन राशन प्रणाली लागू कर दी गई है। कोरोना के चलते देशव्यापी लाकडाउन में गरीबों और मजदूरों का संकट ब़़ढ गया था। लेकिन सरकार ने तय किया था कि देश का कोई गरीब भूखा नहीं सोएगा।

मोदी ने कहा कि गांवों और गरीबों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार ने ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेषष जोर दिया है। इस पर लाखों करोड़रपये खर्च किए जा रहे हैं। दो करोड़से अधिक परिवारों को पक्का मकान मिला है। 10 करोड़परिवारों को शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं। इसी तरह हर व्यक्ति को जनधन खाते से जोड़कर बैंकिग प्रणाली में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा, बीते वषर्ष के दौरान 9.48 करोड़टन खाद्यान्न का आवंटन किया गया था, जो सामान्य वषर्ष के मुकाबले 50 फीसद अधिक है। इस दौरान कुल 2.84 लाख करोड़रपये की खाद्य सब्सिडी दी गई।

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Edited By: Manish Pandey