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'पहली बार हिंदू विजयश्री की ओर बढ़ रहा है', पीएम मोदी ने 1989 के लेख को साझा कर राममंदिर शिलान्यास को किया याद

Published: Thu, 22 Jan 2026 10:17 PM (IST)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 1989 में 'अनिकेत' उपनाम से लिखा एक लेख सामने आया है। इसमें उन्होंने अयोध्या में राममंदिर ...और पढ़ें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 1989 में 'अनिकेत' उपनाम से लिखित एक लेख में अयोध्या में राममंदिर शिलान्यास समारोह को स्वतंत्र भारत में हिंदू चेतना के जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया था। यह लेख 18 नवंबर 1989 को गुजराती पत्रिका साधना के 'अक्षर उपवन' कालम में प्रकाशित हुआ था, जो राममंदिर शिलान्यास (नौ और दस नवंबर, 1989) की स्मृति को जीवंत करता है।

यह लेख आज से दो वर्ष पूर्व 22 जनवरी, 2024 को भव्य राममंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की तीसरी वर्षगांठ पर मोदी आर्काइव ने गुरुवार को एक्स पर साझा किया। प्रधानमंत्री उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) के सक्रिय प्रचारक थे और उन्होंने अयोध्या में शिलान्यास को 450 वर्षों की गुलामी की निशानी पर एक करारा प्रहार और सांस्कृतिक स्वतंत्रता की विजययात्रा के शुभारंभ के रूप में वर्णित किया था।

कांग्रेस सरकार पर साधा गया निशाना

इस लेख में उस दौर की कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा गया था। तत्कालीन सरकार ने राम जन्मभूमि से संबंधित मांगों का विरोध किया था। उस पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति करने और विभिन्न चरणों में आंदोलन को बाधित करने का आरोप भी लगाया गया था। राममंदिर शिलान्यास समारोह विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की ओर से आयोजित किया गया था। इसके लिए देशभर से पवित्र ईंटों (राम शिलाओं) को एकत्र किया गया था।

राममंदिर आंदोलन के दौरान आरएसएस प्रचारक के रूप में मोदी ने गुजरात में चल रहे अभियान में अहम भागीदारी की। उन्होंने मंदिर के लिए ईंट जुटाने के लिए गांवों का दौरा किया और वीएचपी के साथ मिलकर काम किया था।

'पहली बार हिंदू विजयश्री की ओर कदम बढ़ा रहा है'

शिलान्यास समारोह का उल्लेख करते हुए लेख में कहा गया था कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार हिंदू विजयश्री की ओर कदम बढ़ा रहा है। इस बात पर जोर दिया कि अयोध्या की घटना राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक चेतना की सामूहिक अभिव्यक्ति को व्यक्त करती है। उन्होंने लिखा, 'राजनीतिक ठेकेदारी करने वाले कुछ बुद्धिजीवी इसे अपनी कल्पनाओं से रंग देंगे और मनमाने अर्थ निकालेंगे। हिंदू विजय में कुछ लोगों को कांग्रेस की सहमति दिखाई देगी तो कुछ को विश्व हिंदू परिषद की पीछे हटने की कल्पनात्मक साम्राज्य रचना में आनंद आएगा।'

कांग्रेस ने शिलान्यास रोकने के लिए हर कोशिश की थी

लेख में बताया गया कि 1980 के आसपास वीएचपी की अगुआई में राम मंदिर को लेकर जनांदोलन ने तेजी पकड़ी। कांग्रेस ने राममंदिर शिलान्यास को रोकने की पूरी कोशिश की थी। उसने अयोध्या में शिलाएं लाने पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी, पर कुछ हासिल नहीं हुआ। फिर उसने नौ नवंबर (1989) के कार्यक्रम को रोकने का प्रयास किया। सेना और पुलिस तैनात किए गए। भय का साम्राज्य खड़ा किया गया। साधु-संतों को विचलित करने के प्रयास किए गए। इन सबके बावजूद कुछ हालिस नहीं हुआ।

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