वैश्विक संकटों के बीच भारत की उच्च विकास दर, पीएम मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा को बताया भविष्य का आधार
पीएम मोदी ने 'भारत रिनीवेबल एनर्जी समिट' में कहा कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत ने स्वच्छ ऊर्जा निवेश से उच्च विकास दर बनाए रखी है।

पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत की उच्च विकास दर।
HighLights
वैश्विक संकटों के बावजूद भारत की उच्च विकास दर जारी।
स्वच्छ ऊर्जा निवेश ने भारत को संकटों से बचाया।
'पीएम सूर्यघर' व 'कुसुम' योजना से ऊर्जा सुरक्षा।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘भारत रिनीवेबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था ने कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक कई बड़े संकट देखे हैं। पश्चिम एशिया का संकट अभी भी जारी है। इसके बावजूद 140 करोड़ भारतीयों को गर्व है कि भारत ने इन संकटों को बेहतर तरीके से संभाला है और उच्च विकास दर बनाए रखी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भारत पिछले एक दशक में स्वच्छ ऊर्जा पर निवेश नहीं करता और उसके लिए नई व्यवस्थाएं नहीं बनाता, तो संकट बाकी दुनिया से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता था।
मोदी ने कहा कि वैश्विक संकट ने हर देश को यह संदेश दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा सीधे आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है और ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में है। जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता वैश्विक अर्थव्यवस्था को बार-बार बाधित करती रहेगी, क्योंकि इसके भंडार सीमित हैं और कुछ ही क्षेत्रों में हैं, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा का पोटेंशियल असीमित है और हर देश इसका लाभ उठा सकता है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत के अनुसंधान व अनुभव का लाभ पूरी मानवता को मिले, यही हमारी भावना है। ग्रीन एनर्जी को लेकर भी यही भावना है। इस क्षेत्र में भारत की सफलताएं दुनिया के अनेकों देशों के काम आएंगी। उन्होंने उदाहरणों के साथ अपनी बात रखी।
मोदी ने बताया कि फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई थी, जिसके तहत एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। पिछले 24-25 महीनों में 65 लाख से अधिक घर इस अभियान से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि हर छह दिन में एक लाख नए घर इस सोलर मूवमेंट का हिस्सा बन रहे हैं।
एक अध्ययन के अनुसार, इन 65 लाख घरों के बिजली बिल करीब 76 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। कई परिवारों के बिजली बिल शून्य हो गए हैं और कुछ परिवार अतिरिक्त बिजली ग्रिड में बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की यह योजना विशेषकर ग्लोबल साउथ के देशों में ऊर्जा सुरक्षा को बल दे सकती है।
अपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर देश के इस सेमिनार में पीएम मोदी ने भारत की उपलब्धियों के साथ भावी योजनाओं व चुनौतियां का भी पूरा खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में 44 हजार से अधिक सरकारी इमारतें सोलर एनर्जी से जुड़ चुकी हैं, जिससे हर साल करीब 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। किसानों को कुसुम योजना का भी बड़ा लाभ मिल रहा है। इससे 30 लाख से अधिक किसानों के लिए सोलर पावर से सिंचाई की व्यवस्था हुई है।
अनुमान है कि सोलर पंप का लाभ लेने वाले हर किसान को हर साल करीब एक लाख रुपये की बचत हो रही है। अंत में निवेशकों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत जैसी डिमांड, स्केल और स्कोप कहीं और मिलना मुश्किल है। भारत जैसी राजनीतिक और नीतिगत स्थिरता भी कम ही जगहों पर मिलेगी। इसके परिणाम दिख रहे हैं।
पिछले एक दशक में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक, यानी 164 अरब डॉलर का निवेश आया है। इसमें से पिछले दो वर्षों में करीब 6 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है। अनुमान है कि इस दशक के अंत तक इस क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक, यानी करीब 220 अरब डॉलर की निवेश अवसर बनने वाले हैं।
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