'भारत विश्व के साथ, विश्व के लिए विकसित होगा', बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद दुनिया के साथ और उसके लिए विकसित होगा।
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भारत दुनिया के साथ, दुनिया के लिए विकसित होगा: पीएम मोदी
HighLights
भारत दुनिया के साथ, दुनिया के लिए विकसित होगा: पीएम मोदी
तेज आर्थिक वृद्धि, डिजिटल प्रगति पर पीएम मोदी का जोर
वैश्विक अस्थिरता में भारत विश्वसनीयता और स्थिरता का प्रतीक
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ऐसे समय जब दुनिया की हर प्रख्यात आर्थिक एजेंसी की रिपोर्ट बता रही है कि भारत सबसे तेज गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना हुआ है तब पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत अपना विकास जारी रखेगा, चाहे वैश्विक परिस्थितियां साथ दें या न दें।
मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का साफ संकेत दिया कि उन्होंने कहा, 'हम किसी की कीमत पर नहीं बढ़ते। हम दुनिया के साथ और दुनिया के लिए बढ़ते हैं।' यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और रणनीतिक संसाधनों पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है।
माना जा रहा है कि मोदी ने इस मौके पर वैश्विक अस्थिरता और अमेरिका की भारत-विरोधी नीतियों की ओर इशारा किया है, जो टैरिफ, निर्यात प्रतिबंध और रणनीतिक निर्भरता कम करने के प्रयास भारत के हितों को प्रभावित कर रहे हैं।
भारत दुनिया के साथ, दुनिया के लिए विकसित होगा: पीएम मोदी
मोदी ने कहा कि भारत का आर्थिक विकास मजबूत बुनियाद और निरंतर सुधारों पर आधारित है। अप्रैल-जून तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था में सबसे तेज है। विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डालर से अधिक हो चुका है।
उन्होंने कहा, 'अनिश्चितताओं से भरी दुनिया में भारत विश्वसनीयता और स्थिरता का आश्वासन देता है।' यह वृद्धि मजबूत नींव पर हो रही है। चालू खाता घाटा भी काफी कम हो चुका है। पीएम ने भारत के उदय को 'पावर टू एम्पावर' के सिद्धांत से जोड़ा।
उन्होंने कहा, “आज तकनीक शक्ति है, डेटा शक्ति है, ज्ञान शक्ति है, नवाचार शक्ति है। लेकिन असली सवाल यह नहीं कि शक्ति किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका उपयोग कैसे हो रहा है।'
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनोमी फोरम पहली बार भारत में हो रहा है, जिसमें दुनिया भर के अर्थविद व कारोबार घरानों के प्रतिनिधि हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। इनके बीच पीएम मोदी ने पिछले एक दशक में आर्थिक व तकनीक क्षेत्र में भारत की प्रमुख उपलब्धियों को गिनाया।
उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सस्तेमोबाइल डेटा, डिजिटल भुगतान और सरकारी लाभों के डायरेक्ट ट्रांसफर को उदाहरण बताया, जो आर्थिक अवसरों को व्यापक बना रहे हैं। सड़क किनारे के विक्रेताओं से लेकर बड़े कारोबार तक एक ही डिजिटल भुगतान प्रणाली का इस्तेमाल हो रहा है। भारत अपने डिजिटल अनुभव को ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भी साझा कर रहा है।
कोविड काल में विकसित ओपन-सोर्स कोविन प्लेटफार्म इसका उदाहरण है। मोदी ने भारत को वैश्विक आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में पेश किया, जो अन्य देशों की समृद्धि में मदद करना चाहता है, न कि उनकी कीमत पर आगे बढ़ना।
वैश्विक अस्थिरता में भारत विश्वसनीयता और स्थिरता का प्रतीक
भारत निवेश आकर्षित करने, मैन्यूफैक्चरिंग आधार बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जबकि कई सरकारें और कंपनियां उत्पादन में विविधता लाने और रणनीतिक निर्भरता कम करने पर काम कर रही हैं।
मोदी ने कहा कि, “इक्कीसवीं सदी के इस दशक में अभूतपूर्व वैश्विक चुनौतियां सामने आई हैं। पिछले छह वर्षों में हमने वैश्विक महामारी देखी, विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध छिड़े और व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज तथा ऊर्जा आपूर्ति में भी बाधाएं आईं।
दुनिया एक संकट से निकलने का रास्ता तलाशती है, तब तक नया संकट आ खड़ा होता है। जो चीजें कभी दुनिया को जोड़ती थीं, वे अब दबाव और दबदबे का हथियार बन रही हैं।
आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा, खनिज, भुगतान प्रणाली और तकनीक का इस्तेमाल नियंत्रण के लिए हो रहा है। वैश्वीकरण के वर्षों में बने रास्ते अब चोकपॉइंट्स में बदल गए हैं। इसी बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर क्षेत्र में काम करने के तरीके बदल रही है और कई देशों में उम्र बढ़ने से जुड़ी चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं।
ऐसे में दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल भरोसे का है। भरोसा कि जरूरत पड़ने पर आपूर्ति जारी रहेगी, जो वादा किया गया है वह निभाया जाएगा और संकट के समय साथी देश साथ खड़ा रहेगा। यहीं भारत एक अलग सोच और मिजाज के साथ आगे आता है।'
