PNG vs LPG: क्या सिलिंडर से बेहतर है पाइप गैस, कौन-सा है सस्ता? पढ़ें फायदे
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण भारत में एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है, जबकि पीएनजी ...और पढ़ें
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एलपीजी पर संकट, पीएनजी से राहत भारत में गैस सप्लाई का फर्क समझिए (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत में LPG सिलिंडर की सप्लाई को लेकर कई जगह चिंता बढ़ गई है। इसके विपरीत, पाइप से मिलने वाली गैस यानी PNG की सप्लाई अभी तक काफी हद तक सामान्य बनी हुई है।
ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि जब दोनों ही गैस खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होती हैं, तो एलपीजी पर दबाव क्यों है और पीएनजी की सप्लाई क्यों स्थिर है। इसका जवाब इन दोनों ईंधनों की सप्लाई व्यवस्था, आयात पर निर्भरता और वितरण प्रणाली में छिपा है।
सरकार के अधिकारियों के अनुसार मौजूदा हालात में लोगों को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके।
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एलपीजी और पीएनजी क्या हैं और इनमें क्या फर्क है?
- भारत में लंबे समय से खाना बनाने के लिए एलपीजी सिलिंडर सबसे आम ईंधन रहा है।
- एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस को सिलिंडर में भरकर गैस एजेंसियों के जरिए घरों तक पहुंचाया जाता है। इसके लिए सिलिंडर की बुकिंग, डिलीवरी और परिवहन की पूरी व्यवस्था होती है।
- इसके विपरीत पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों और दुकानों तक पहुंचती है, बिल्कुल पानी की सप्लाई की तरह।
भारत में पीएनजी नेटवर्क कितनी तेजी से बढ़ रहा?
- सरकार के अनुसार अभी भारत के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पीएनजी नेटवर्क पहुंच चुका है।
- करीब 1.59 करोड़ घरों में पीएनजी कनेक्शन लगाए जा चुके हैं।
- सरकार का लक्ष्य है कि 2034 तक देश में 12.63 करोड़ घरों को पीएनजी से जोड़ा जाए।
हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने भी लोगों से पीएनजी कनेक्शन लेने की अपील की थी ताकि एलपीजी सप्लाई पर दबाव कम हो सके।
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पीएनजी की सप्लाई स्थिर क्यों रहती है?
पीएनजी की सप्लाई स्थिर रहने के पीछे कई कारण हैं:-
1. देश में प्राकृतिक गैस का उत्पादन
- भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत लगभग 189 MMSCMD है।
- इसमें से करीब 97.5 MMSCMD यानी लगभग 50% गैस देश के अंदर ही पैदा होती है।
- रेटिंग एजेंसी ICRA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार घरेलू उत्पादन होने से अचानक सप्लाई रुकने का खतरा कम हो जाता है।
2. कई देशों से गैस आयात
- भारत प्राकृतिक गैस कई देशों से आयात करता है।
- GAIL के अधिकारियों के अनुसार अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से गैस आती है।
- इससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है और सप्लाई ज्यादा सुरक्षित रहती है।
3. पाइपलाइन से लगातार सप्लाई
- पीएनजी पाइपलाइन के जरिए लगातार बहती रहती है।
- इसमें सिलिंडर की डिलीवरी या ट्रांसपोर्ट जैसी समस्याएं नहीं होतीं, इसलिए संकट के समय भी सप्लाई ज्यादा स्थिर रहती है।
एलपीजी की सप्लाई पर दबाव क्यों?
- एलपीजी की स्थिति पीएनजी से काफी अलग है।
- भारत अपनी जरूरत का लगभग 62 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से आयात करता है।
- इन आयातों में से लगभग 90 प्रतिशत तेल टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आते हैं, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।
- पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे एलपीजी सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
- स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने एलपीजी वितरण में प्राथमिकता तय की है।
- ऊर्जा वितरण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट के प्रावधानों का भी इस्तेमाल किया है।
मौजूदा प्राथमिकता व्यवस्था इस प्रकार है:-
- घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं को सबसे पहले गैस दी जाएगी।
- इसके बाद परिवहन के लिए सीएनजी की सप्लाई।
- व्यावसायिक पीएनजी सप्लाई को लगभग 30 प्रतिशत तक कम किया गया है।
उद्योग और व्यापार पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों के लिए गैस की कमी से निपटना अपेक्षाकृत आसान होता है। ICRA के विशेषज्ञ प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार उद्योग जरूरत पड़ने पर प्रोपेन या कोयले जैसे विकल्प इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसाय जो एलपीजी सिलिंडर पर निर्भर हैं, उनके पास विकल्प बहुत सीमित होते हैं। इसी वजह से सिलिंडर की कमी सबसे ज्यादा इन्हीं क्षेत्रों में दिखाई देती है।
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पीएनजी के फायदे
- लगातार सप्लाई- पाइपलाइन से गैस लगातार मिलती रहती है।
- घरेलू उत्पादन का सहारा- आधी गैस भारत में ही बनती है।
- कई देशों से आयात- सप्लाई का जोखिम कम होता है।
- सरकारी प्राथमिकता- घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाती है।
क्या पूरी तरह से सुरक्षित है PNG?
- अधिकारियों के अनुसार पीएनजी पूरी तरह संकट से सुरक्षित भी नहीं है।
- भारत अभी भी अपनी लगभग 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से आयात करता है।
- अगर वैश्विक तनाव और बढ़ता है या LNG की सप्लाई बाधित होती है, तो व्यावसायिक गैस सप्लाई में और कटौती करनी पड़ सकती है।
भारत के लिए बड़ी सीख
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा एलपीजी संकट से यह साफ हो गया है कि देश में पीएनजी नेटवर्क को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार, घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाना और एलपीजी आयात पर निर्भरता कम करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बना सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर देशभर में ज्यादा घरों और व्यवसायों को पीएनजी से जोड़ा जाए, तो भविष्य में एलपीजी सप्लाई पर पड़ने वाला दबाव काफी कम किया जा सकता है।
