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सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग, याचिका पर गुरुवार को होगी सुनवाई

Published: Tue, 13 Oct 2026 11:59 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें न्यायालय परिसर के भीतर राजनीतिक गतिविधियों और प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

न्यायालय परिसर में राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की गई

न्यायालय परिसर में राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की गई

HighLights

  1. न्यायालय परिसर में राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की गई

  2. सुरक्षा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु याचिका दायर

  3. राहुल गांधी समेत नेताओं के आचरण की जांच का अनुरोध

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक गतिविधियों और प्रदर्शनों को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल हुई है जिसमें न्यायालय परिसरों की सुरक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और विचाराधीन मामलों में राजनीतिक दबाव रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट और सभी हाई कोर्ट परिसरों के भीतर राजनीतिक जुलूस, धरना, नारेबाजी, झंडे बैनर के प्रदर्शन तथा राजनीतिक प्रेस कान्फ्रेंस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। मंगलवार को कोर्ट से याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की गई। याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होने की संभावना है।

न्यायालय परिसर में राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग  

चार वकीलों दिगांत मिश्रा, दिव्यांश बिस्ट, आशीष गोपाल गर्ग और श्वेता गर्ग ने एओआर उत्कर्ष जायसवाल के जरिये दाखिल याचिका का वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने सीजेआइ सूर्यकांत की पीठ के समक्ष उल्लेख कर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। कोर्ट ने अन्य याचिकाओं के साथ गुरुवार को सुनवाई किए जाने की बात कही। हालांकि उसके पहले याचिका के डिफेक्ट दूर करने होंगे।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार 12 अक्टूबर को चुनाव संबंधी मुद्दों और एसआईआर को लेकर नेताओं और समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। पुलिस ने भगवान दास रोड पर बैरिकेड लगाकर जुलूस को न्यायालय परिसर से पहले रोक दिया। वहीं, नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को रिट याचिका दाखिल करने के लिए परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई।

याचिका में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव समेत संबंधित नेताओं के आचरण की जांच की मांग की गई है। साथ ही मुख्य न्यायाधीश के इस्तीफे से जुड़े इंटरनेट मीडिया बयानों का भी उल्लेख किया गया है।

याचिका में घटनाओं से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश नियंत्रण एवं आगंतुक अभिलेख, सुरक्षा रिपोर्टों को संरक्षित रखने की मांग की गई है। संबंधित नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध भी किया है।

प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई 15 अक्टूबर तक टली

दिल्ली में प्रदर्शनों, मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने और ट्रेन सेवाओं में व्यवधान से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 15 अक्टूबर तक के लिए टाल दी है। जस्टिस वी. मोहना के अस्वस्थ होने के कारण सुनवाई स्थगित की गई। ये याचिकाएं मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों से पहले उठाए गए कदमों से संबंधित हैं।

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची और जस्टिस वी.मोहना की पीठ को प्रदर्शन से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई करनी थी। अस्वस्थ होने के बावजूद न्यायमूर्ति मोहना मंगलवार को अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए। सुनवाई की शुरुआत में ही सीजेआइ ने वकीलों को बताया कि न्यायमूर्ति मोहना की तबीयत ठीक नहीं है, लेकिन इसके बावजूद वह अदालत आई हैं।

सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से सुनवाई स्थगित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन सहित अन्य वरिष्ठ वकीलों ने भी सुनवाई टालने पर सहमति जताई।

तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शन से पहले मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की कथित अवहेलना को लेकर दायर अवमानना याचिका पर केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए मंगलवार तक का समय दिया गया था। उन्होंने कहा कि हलफनामा तैयार है।

वह उसे और व्यापक बनाने के लिए इसमें कुछ बातें जोड़ना चाहते हैं। इसके बाद पीठ ने केंद्र को हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दे दिया और निर्देश दिया कि इसकी प्रति याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होने वाले वकीलों को भी उपलब्ध कराई जाए।

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