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सड़क पर बवाल, सुप्रीम कोर्ट में चुप्पी; क्या विपक्ष ने मान लिया SIR चुनाव आयोग का अधिकार?

Published: Tue, 13 Oct 2026 09:12 PM (IST)

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी सड़कों पर एसआईआर का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने इसकी ...और पढ़ें

SIR को लेकर विपक्षी दलों का दोहरा रुख (फोटो-एएनआइ)

SIR को लेकर विपक्षी दलों का दोहरा रुख (फोटो-एएनआइ)

HighLights

  1. कांग्रेस सड़कों पर SIR का विरोध कर रही है।

  2. सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर की वैधता को चुनौती नहीं दी।

  3. पंजाब मतदाता सूची और ईवीएम समीक्षा की मांग।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस सड़कों और रैलियों में तो पूरे एसआइआर को खारिज करने और एसआईआर के बाद हुए चुनाव वाले राज्यों में फिर से चुनाव की मांग कर रही है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एसआइआर को खारिज करने की मांग ही नहीं की।

प्रक्रियात्मक मुद्दों पर सवाल खड़े किए गए। याचिका में कहा गया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले से अवगत हैं जिसमें एसआइआर की वैधता को बरकरार रखा गया था। कहा है कि इस याचिका का उद्देश्य एसआइआर की वैधता को दोबारा चुनौती देना नहीं है।

विपक्षी दलों ने माना- SIR वैध

इस याचिका का विषय सीमित और अलग है यह जानना चाहती है कि क्या कोर्ट द्वारा मान्य सुरक्षा उपायों का पालन किया गया है तथा क्या निर्वाचन आयोग ने एक सामूहिक संवैधानिक संस्था के रूप में कार्य करने की आवश्यकता का पालन किया गया है।

यानी अब विपक्षी दलों ने स्वीकार कर लिया है कि एसआइआर चुनाव आयोग का अधिकार है और वैध है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कई त्रुटियां थीं और मंगलवार को वह सुनवाई पर नहीं पाई।

बहरहाल याचिका में पंजाब का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि वर्तमान याचिका की तात्कालिकता पंजाब में हुए घटनाक्रम से स्पष्ट होती है। जिसमें 13 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में जून 2026 में दर्ज लगभग 2.14 करोड़ मतदाताओं की संख्या की तुलना में लगभग 20.66 लाख नामों की कमी दिखाई देती है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रभावी सुरक्षा उपायों तथा त्रुटियों को सुधारने और पात्र मतदाताओं के नाम पुनः बहाल करने की कार्यशील व्यवस्था के अभाव में, आगामी चुनावों में भाग लेने के पात्र व्यक्तियों के नाम अंतिम निर्वाचक नामावली से बाहर रह सकते हैं और उन्हें चुनाव से पहले प्रभावी उपचार प्राप्त नहीं हो पाएगा। ऐसी चिंताएं उन सभी राज्यों में पैदा होती हैं जहां चुनाव होने वाले हैं।

याचिका में ईवीएम के प्रयोग पर भी जांच किये जाने की जरूरत बताई गई है। कहा गया है कि याचिकाकर्ता ईवीएम के उपयोग और तैनाती से संबंधित निर्णयों , नीतियों, प्रक्रियाओं, प्रोटोकॉल, तकनीकी डिजाइनों और संरचना की भी स्वतंत्र समीक्षा चाहते हैं।

वैसे यह तथ्य है कि खुद चुनाव आयोग कई बार राजनीतिक दलों को हैकाथान के लिए आमंत्रित करता है ताकि वह खुद ईवीएम से छेड़छाड़ कर दिखा पाएं। कई दल उसमें शामिल ही नहीं होते हैं।

विपक्षी दलों की मांग

मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ व अन्य प्रतिष्ठित नागरिक शामिल हों।

ये समिति एक तय समय सीमा के भीतर एसआइआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों तथा उनमें किये गए परिवर्तनों का ऑडिट करे और ईवीएम के उपयोग एवं तैनाती से संबंधित निर्णयों , नीतियों प्रक्रियाओं, प्रोटोकाल और तकनीकी डिजाइनों और संरचना की व्यापक समीक्षा करे।

मांग की गई है कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर निर्णय होने तक पूरे भारत के राज्यों में चल रही एसआइआर प्रक्रिया को अंतरिम तौर पर निलंबित कर दिया जाए।

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