जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र की वित्तीय कंपनी पावर फाइनेंस कारर्पोरेशन (पीएफसी) ने कहा है कि वह इलेक्टि्रक वाहनों के चार्जिग समेत कई नए कारोबार में उतरने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसमें शहरी स्वच्छता से जुड़े क्षेत्र भी हो सकते हैं। 

नई नीति होगी तैयार
बिजली से चलने वाले वाहनों की चार्जिग सुविधा देने पर कंपनी नीति आयोग की उस रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जिसके आधार पर देश में नई नीति तैयार की जाएगी। यह जानकारी पीएफसी के सीएमडी राजीव शर्मा ने यहां दी। उन्होंने यह भी बताया कि कई वजहों से लंबित पांच बिजली परियोजनाओं की राह निकलती नजर आ रही है। यानी इन परियोजनाओं के नए सिरे से शुरु होने की उम्मीद बढ़ गई है। इन परियोजनाओ को पीएफसी ने कर्ज दे रखा है।

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बिजली परियोजनाओं से कर्ज वसूली होने के आसार 
शर्मा ने कहा कि बिजली क्षेत्र का सबसे खराब दौर समाप्त हो गया है। इस वर्ष कोई भी नया एनपीए खाता नहीं बना है। एक महीने के भीतर पांच फंसे बिजली परियोजनाओं से कर्ज वसूली होने के आसार हैं। इन परियोजनाओं में पीएफसी ने 8,254 करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा है। इसका एक बड़ा हिस्सा वसूल होने से कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर काफी सकारात्मक असर पड़ेगा।

40 हजार मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन 
देश की तमाम फंसे बिजली कंपनियों में पीएफसी ने कुल 17,238 करोड़ रुपये का निवेश कर रखा है। फंसी बिजली परियोजनाएं वे हैं जो किसी न किसी वजह से बिजली उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। ऐसी परियोजनाओं की संख्या तकरीबन 40 है और इनमें बैंकों ने 2.30 लाख करोड़ रुपये की राशि कर्ज दे रखी है। इन परियोजनाओं के शुरु होने से 40 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरु हो सकता है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh