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'जनसंख्या असंतुलन पर ध्यान दें...', आर्गनाइजर पत्रिका ने कहा- आबादी पर राष्ट्रीय नीति बनाएं

जनसंख्या संबंधी असंतुलन का मुद्दा एकबार फिर उठाया गया है। इस बार यह मुद्दा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी एक पत्रिका ने देश की जनसंख्या को लेकर ध्यान आकर्षित किया है। आर्गनाइजर साप्ताहिक के एक नवीनतम संस्करण के संपादकीय में बढ़ती आबादी लेकर चिंता जताई गई है। बढ़ती आबादी को लेकर इस पर काबू पाने के लिए अब देश में एक राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण नीति अपनाने की बात की है।

By Agency Edited By: Babli Kumari Tue, 09 Jul 2024 11:45 PM (IST)
'जनसंख्या असंतुलन पर ध्यान दें...', आर्गनाइजर पत्रिका ने कहा- आबादी पर राष्ट्रीय नीति बनाएं
आर्गनाइजर साप्ताहिक पत्रिका ने बढ़ती देश की जनसंख्या पर जताई चिंता (प्रतिकात्मक फोटो)

पीटीआई, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी एक पत्रिका ने देश में जनसंख्या संबंधी असंतुलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ खास क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी बेतहाशा बढ़ी है। इस पर काबू पाने के लिए अब देश में एक राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण नीति अपनाने की जरूरत है।

आर्गनाइजर साप्ताहिक के नवीनतम संस्करण के संपादकीय में आबादी के क्षेत्रीय असंतुलन को लेकर चिंता जताई गई है। साथ ही नीति के जरिये इसमें दखल देने को कहा है। उनका कहना है कि पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर उठाए गए कदमों में फिर भी बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्हें डर है कि अगर मूल आबादी ही बदल गई तो वह जनगणना के बाद संसद में कुछ सीटें हार जाएंगे।

क्षेत्रीय असंतुलन एक महत्वपूर्ण आयाम

क्षेत्रीय असंतुलन एक महत्वपूर्ण आयाम है। यह भविष्य में संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन को प्रभावित करेगा। इसलिए हमें ऐसी नीतियों की आवश्यकता है जो यह सुनिश्चित करे कि आबादी बढ़ने से किसी एक धार्मिक समुदाय या क्षेत्र पर उसका विपरीत असर नहीं पड़े। क्योंकि ऐसा हुआ तो सामाजिक-आर्थिक असमानताएं बढ़ने के साथ ही राजनीतिक संघर्ष भी बढ़ेंगे।

बंगाल, बिहार, असम व उत्तराखंड में मुसलमानों की आबादी बढ़ी

संपादकीय में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या के प्रारूप में स्थिरता बनी हुई लेकिन सभी धर्मों और क्षेत्रों के आधार पर ऐसा नहीं है। सीमावर्ती जिलों समेत बहुत से इलाकों में मुस्लिम आबादी बहुत तेजी से बढ़ी है। सीमावर्ती राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और उत्तराखंड में अप्राकृतिक रूप से मुसलमानों की आबादी बढ़ी है। खासकर सीमा से लगे इलाकों में 'अवैध आव्रजकों' की संख्या बहुत बढ़ गई है।

'हमें और सतर्कता बरतने की जरूरत'

आर्गेनाइजर के अनुसार लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की संख्या बहुत महत्वपूर्ण होती है। और इसका भाग्य जनसंख्या का स्वरूप तय करता है। इस चलन को लेकर हमें और सतर्कता बरतने की जरूरत है। संपादकीय में कहा गया कि भारत को जनसंख्या नीति पर विचार करने की जरूरत है। जनसंख्या की नीति उसकी जटिलताओं से जुड़ें मुद्दों और राष्ट्र की आवश्यकता पर आधारित होनी चाहिए। जापान दशकों से नकारात्मक वृद्धि दर का सामना कर रहा है जबकि चीन ने जनसंख्या नियंत्रण की अपनी नीति को ही पलट दिया है।

राहुल, ममता, द्रविड़ नेता हिंदुओं को अपमानित करते रहते हैं

आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में आरोप लगाया है कि राहुल गांधी जैसे नेता जब-तब हिंदुओं की भावनाओं को आहत करना वहन कर सकते हैं। ममता (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) हमेशा मुस्लिम कार्ड खेल सकती हैं, फिर चाहे मामला इस्लामी हमलावारों के हाथों महिलाओं पर अत्याचार का ही मामला क्यों नहीं हो। द्रविड़ पार्टियां सनातन धर्म को अपमानित करने में अपना गौरव समझती हैं। यह सब सिर्फ इसलिए क्योंकि कथित अल्पसंख्यक वोट बैंक इसी जनसंख्या असंतुलन से विकसित होता है।

भयभीत करने वाले हालात से हमें सीख लेनी चाहिए

संपादकीय में इस बात पर जोर दिया गया है कि आरएसएस के विभिन्न संगठनों और प्रस्तावों में कहा गया है कि देश के बंटवारे के भयभीत करने वाले हालात से हमें सीख लेनी चाहिए। अभी जो हो रहा है वह राजनीतिक रूप से सही हो सकता है, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से सरासर गलत है। हमें इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाना होगा। 

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