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देश भर के पारसी संगठन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट विवाद में हस्तक्षेप की मांग

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:37 PM (IST)

कई पारसी संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के बीच चल रहे विवाद में हस्तक्षेप की मांग की है।

टाटा समूह में चल रहे विवाद में दखल दें पीएम मोदी-पारसी संगठन

टाटा समूह में चल रहे विवाद में दखल दें पीएम मोदी-पारसी संगठन

HighLights

  1. पारसी संगठनों ने पीएम मोदी को पत्र लिखा।

  2. टाटा संस की लिस्टिंग पर चिंता जताई।

  3. टाटा समूह के मूल्यों की रक्षा की मांग।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कई पारसी संगठन और पारसी धर्म से जुड़े कई सामुदायिक संगठनों ने टाटा ट्रस्ट के प्रति अपना समर्थन जताया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में इन संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल एक कारपोरेट या शेयरधारक विवाद तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर भारत के सबसे प्रमुख व्यावसायिक संस्थानों में से एक पर पड़ सकता है।

अपने पत्र में इन संगठनों ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि टाटा समूह से जुड़े मूल्य, गवर्नेंस और दीर्घकालिक दृष्टिकोण सुरक्षित रहें।

पत्र में कहा गया है कि टाटा संस के स्वामित्व में टाटा ट्रस्ट की अहम भूमिका है और यह समूह को परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धतताओं को बनाए रखते हुए दीर्घकालिक लक्ष्यों को हासिल करने में सक्षम बनाता है।

इन संगठनों ने टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग को लेकर चल रही बहस पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इसे केवल एक नियामक या तकनीकी मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए। इसके प्रभाव कहीं अधिक गहरे हैं।

कोई भी ऐसा बदलाव जो दीर्घकालिक प्रबंधन और अल्पकालिक बाजार अपेक्षाओं के बीच के संतुलन को बिगाड़ता है, वह टाटा संस और व्यापक रूप से पूरे टाटा समूह के मूल स्वरूप, मूल्यों और उसकी पहचान को प्रभावित कर सकता है।

टाटा ट्रस्ट और टाटा संस से जुड़े घटनाक्रमों पर चिंता जताते हुए इन संगठनों ने कहा कि इस मामले के निहितार्थ तात्कालिक कारपोरेट विवाद से कहीं आगे तक जाते हैं।

पत्र में कहा गया है, 'यह भारत के सबसे सम्मानित संस्थानों में से एक के भविष्य के स्वरूप और उसके उद्देश्य का सवाल है। एक ऐसा संस्थान जिसकी वैश्विक उपस्थिति और प्रतिष्ठा है।'

इन संगठनों ने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया है कि वे मौजूदा चुनौतियों को व्यापक राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए इनका अवलोकन करें और टाटा नाम से जुड़ी विरासत की रक्षा करें।

इस पत्र पर पारसी पंचायत बांबे के फंड और संपत्तियों के ट्रस्टी बोर्ड, फेडरेशन आफ पारसी जोरोस्ट्रियन अंजुमन आफ इंडिया, फेडरेशन आफ जोरोस्ट्रियन एसोसिएशन आफ नार्थ अमेरिका, जोरोस्ट्रियन ट्रस्ट फंड्स आफ यूरोप, ग्लोबल काउंसिल आफ जोरोस्ट्रियन ट्रस्ट और वर्ल्ड जोरोस्ट्रियन चैंबर आफ कामर्स के हस्ताक्षर हैं।

66 प्रतिशत है टाटा संस में ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी

टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत है। ट्रस्ट्स का मानना है कि टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं कराना चाहिए। ट्रस्ट्स का तर्क है कि मौजूदा स्वामित्व ढांचा दीर्घकालिक निर्णय लेने, परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है।

हालांकि, आरबीआइ ने सितंबर 2026 में मूल निवेश कंपनी के रूप में अपना पंजीकरण वापस लेने के लिए टाटा संस को दिए गए आवेदन को खारिज कर दिया है। इससे शेयर बाजार में लिस्टिंग का सवाल फिर से चर्चा में आ गया है।

आरबीआइ के इस फैसले के बाद टाटा संस का बोर्ड संभावित लिस्टिंग की दिशा में कदम उठाने के लिए सहमत हो गया, जिसका टाटा ट्रस्ट्स ने विरोध किया है।

इस असहमति ने टाटा संस के बोर्ड और उसके सबसे बड़े शेयरधारक के बीच अधिकारों के संतुलन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

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