नई दिल्ली, प्रेट्र : नोटबंदी के मामले में संसदीय समिति ने एक बार फिर से रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के गवर्नर उर्जित पटेल को बुलाया है। उन्हें 25 मई को समिति के सामने पेश होना है। इसमें सांसद उनसे यह सवाल पूछ सकते हैं कि नोटबंदी के चलते कितनी राशि बैंकिंग सिस्टम में वापस आई है। उनसे यह भी पूछा जा सकता है कि बैंकों का कामकाज कब सामान्य होगा। इससे पहले जनवरी में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पटेल को समिति के समक्ष फिर से बुलाने के लिए भाजपा सांसदों को मनाया था।

दिलचस्प है कि पटेल जब वित्त मामलों पर संसद की स्थायी समिति के समक्ष इस साल जनवरी में पेश हुए थे, तो उनसे कई अटपटे सवाल किए गए थे। उस वक्त खुद आरबीआइ गवर्नर रह चुके मनमोहन उनके बचाव में आए थे। पूर्व प्रधानमंत्री ने समिति के सदस्यों को समझाया था कि गवर्नर का सम्मान किया जाए। उनसे अटपटे सवाल नहीं पूछे जाएं।

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सूत्रों और समिति के सदस्यों ने बताया कि पटेल से कहा गया है कि वह फिर से पेश हों और सदस्यों को नोटबंदी के बारे में बताएं, क्योंकि इस बारे में अभी चर्चा पूरी नहीं हुई है। समिति के एक सदस्य ने कहा, 'निशिकांत दुबे समेत भाजपा के सदस्य समिति के सामने आरबीआइ गवर्नर की पेशी के पक्ष में नहीं थे। मगर मनमोहन के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों के जोर देने पर पटेल को बुलाने का फैसला किया गया।'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली के नेतृत्व वाली समिति ने नोटबंदी के मसले पर आरबीआइ के शीर्ष अफसरों के अलावा वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को भी बुलाया था। इसका मकसद पांच सौ व हजार रुपये के नोट बंद करने के फैसले और इसके असर को लेकर चर्चा करना था।

दृष्टिहीनों को नए नोट पहचानने में मुश्किल

दृष्टिहीनों को 500 रुपये और 2000 रुपये के नए नोटों को पहचानने में खासी मुश्किल हो रही है। उनके संगठन नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड (एनएबी) ने कहा है कि ये नए नोट दृष्टिहीनों के अनुकूल नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि इनमें पर्याप्त उभरे या उकेरे हुए आकार नहीं बनाए गए हैं। इस कारण दृष्टिहीन केवल छूकर इन नए नोटों की पहचान नहीं कर पा रहे हैं।

एनएबी के महासचिव जोआक्विम रापोज ने कहा कि उन्हें आरबीआइ की ओर से उन्हें बताया गया था कि बाद में आने वाले पांच सौ और दो हजार के नए नोटों में ऐसी व्यवस्था की जाएगी। लेकिन हमारी इस समस्या के समाधान के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

Posted By: Sachin Bajpai

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