केंद्र सरकार की बड़ी पहल; अब गांवों तक पहुंचेगा EV चार्जिंग नेटवर्क, पंचायतें लीज पर देंगी जमीन
केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार के लिए पंचायती राज मंत्रालय और सीईएसएल के बीच समझौता किया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार
HighLights
पंचायती राज मंत्रालय और सीईएसएल ने ग्रामीण ईवी नेटवर्क हेतु समझौता किया।
पंचायतें इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन व बैटरी स्वैपिंग हेतु भूमि देंगी।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, आय भी बढ़ेगी।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना चाहती है, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर खास तौर पर चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता बड़ी चुनौती है।
अब तक की स्थिति में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों भले ही इस दिशा में गति पकड़ी है, लेकिन अब भी इसका दायरा मुख्यत: शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित है।
अब सरकार ने ईवी चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों में करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय किया है। इसके लिए पंचायतीराज मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय की एजेंसी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड ने हाथ मिलाया है।
पंचायतें इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन व बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के लिए भूमि देंगी और उस भूमि पर यह एजेंसी स्टेशन स्थापित कराएगी। संचालन और रखरखाव वही संभालेगी, लेकिन इससे ओएसआर के रूप में पंचायतों की आय भी बढ़ेगी।
पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित जन योजना अभियान की कार्यशाला में यह महत्वपूर्ण एमओयू मंत्रालय और सीईएसएल के बीच हुआ। सरकार की योजना है कि ग्राम पंचायत, ब्लाक पंचायत और जिला पंचायतें अपने अधिकार क्षेत्र की भूमि ईवी चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के लिए देंगी।
नियम-शर्तों के अधीन ऊर्जा मंत्रालय की एजेंसी दस वर्ष के लिए इस जमीन को लीज पर लेकर उस पर ईवी चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन की स्थापना करेगी। एजेंसी की प्राथमिकता में राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे स्थित पंचायतों की भूमि के अलावा पंचायत कार्यालयों से सटी भूमि होगी।
एजेंसी ऐसे स्टेशन वहां लगाएगी, जहां दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया, मध्यम और भारी वाहनों सहित विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग हो सके। भूमि उपलब्धत कराने के लिए पंचायतीराज मंत्रालय राज्य पंचायतीराज विभागों के साथ समन्वय करेगा।
सीईएसएल चयनित स्थलों पर ईवी चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के लिए स्थल आकलन, मांग का अनुमान, आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण, कमीशनिंग, संचालन और रखरखाव का कार्य करेगा।
एमओयू के दौरान सीईएसएल की ओर से बताया गया कि अब इस एमओयू के बाद विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, लेकिन अनुमान यह है कि यदि कोई पंचायत सौ वर्ग मीटर का स्थान चार्जिंग स्टेशन के लिए उपलब्ध कराती है तो पंचायत को उससे औसतन चार हजार रुपये प्रति माह की आय होगी।
संचालन और रखरखाव का जिम्मा एजेंसी का होगा। इसके लिए पंचायतों को अपनी आय में से कुछ भी नहीं देना है। एमओयू के दौरान केंद्रीय पंचायतीराज मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह का कहना था कि इस साझेदारी से पंचायतों के स्वयं के राजस्व यानी ओएसआर में वृद्धि होगी।
साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा और गांवों तथा उनके आसपास के क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी। सचिव विनीत जोशी ने भी इसके महत्व पर अपने विचार रखे।
उल्लेखनीय है कि फरवरी, 2026 में सरकार की ओर से संसद में जानकारी दी गई थी कि देश में 29151 सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना हो चुकी थी। पीएम-ई ड्राइव के तहत इनकी संख्या बढ़ाने के प्रयास लगातार चल रहे हैं।
वहीं, ऊर्जा मंत्रालय की एजेंसी द्वारा यह भी बताया गया है कि उसने इस तरह स्थानीय निकायों की भूमि पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए नगर निकायों से भी बातचीत शुरू की है, लेकिन सबसे पहला एमओयू पंचायतीराज मंत्रालय के साथ ही हुआ है।
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