विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अरब सागर में चीन की चाल चल रहा पाकिस्तान, 'ग्रे-जोन रणनीति का कैसे कर रहा इस्तेमाल?

Published: Wed, 16 Sep 2026 06:35 PM (IST)

उत्तरी अरब सागर में हुई यह घटना पाकिस्तान द्वारा 'ग्रे-जोन' रणनीति के उपयोग और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के उपायों पर सवाल उठाती है।

अरब सागर में कैसे हो रहा 'ग्रे-जोन' रणनीति का इस्तेमाल।

अरब सागर में कैसे हो रहा 'ग्रे-जोन' रणनीति का इस्तेमाल।

HighLights

  1. पाकिस्तानी नौसेना के जहाज ने भारतीय युद्धपोत को टक्कर मारी।

  2. घटना उत्तरी अरब सागर में हुई, कोई बड़ा नुकसान नहीं।

  3. भारत ने इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर उठाया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के एक जहाज की टक्कर भारतीय नौसेना के जहाज से हो गई। भारतीय जहाज एक रुटीन मिशन पर था, तभी तेजी से आते हुए पाकिस्तानी नौसेना के जहाज ने उसके पास पहुंचकर टक्कर मारी।

भारतीय नौसेना के सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी जहाज ने गैर-पेशवर और असुरक्षित तरीके से हरकत की, जिससे टक्कर हुई, हालांकि, किसी नुकसान की खबर नहीं है। नौसेना के एक अन्य सूत्र ने कहा कि यह घटना आपसी सहमति से तय किए गए विश्वास बहाली के उपायों के खिलाफ है, इसलिए इस मुद्दे पर कूटनीतिक स्तर पर उठाया गया है।

विदेश मंत्रालय ने इस घटना को लेकर पाकिस्तान के राजनयिक प्रतिनिधि को तलब किया है और इस्माबाद में भारतीय 'चार्ज डी अफेयर्स' को भी निर्देश दिया है कि वहां की सरकार के सामने यह मुद्दा उठाएं। 2011 के बाद से यह ऐसी दूसरी घटना है। उस समय भी पाकिस्तानी युद्धपोत PNS बाबर ने उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना जहाज के जहाज को टक्कर मारी थी।

समुद्र में टक्कर मारना

समुद्र में युद्ध की रणनीति के तौर पर टक्कर मारना उतनी ही पुराना है जितना कि खुद नौसैनिक युद्ध। नौसैनिक रैमिंग का इतिहास बहुत पुराना है। रोमन और ग्रीक दोनों ही इसे एक मुख्य हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते थे। रोमन लोग अपनी गैली (नोकाओं) में 'रोस्ट्रम' टक्कर मारने वाला हिस्सा लगाता थे, और ग्रीक लोगों ने खास तौर पर इस रणनीति के लिए 'ट्राइरीम' बनाई थीं।

बड़े युद्धपोतों के बीच रैमिंग का पहला आधुनिक उदाहरण अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान 1862 में हैम्पटन रोड्स की लड़ाई में देखने को मिला, जब कॉन्फेडरेट सेना के बख्तरबंद जहाज CSS वर्जीनिया ने यूनियन सेना के फ्रिगेट कंबरलैंड को टक्कर मारी और तेजी से डुबो दिया।

चीन की 'ग्रे-वॉर' रणनीति का इस्तेमाल कर रहा पाकिस्तान

साउथ चाइना सी में चीन का रैमिंग और वाटर कैनन का इस्तेमाल 'ग्रे-जोन वॉरफेयर' पर बढ़ती बहस के केंद्र में है। बीजिंग अपने कोस्ट गार्ड और समुद्री मिलिशिया का इस्तेमाल जहाजों को टक्कर मारने और विरोधियों पर तेज दबाव वाले वॉटर कैनन से हमला करने के लिए करता है।

वह कानूनी अस्पष्टता का फायदा उठाकर बिना किसी औपचारिक सैन्य प्रतिक्रिया को उकसाए अवैध क्षेत्रीय दावों को मजबूत करता है, ठीक वैसे ही जैसे पूर्वी लद्दाख और अन्य जगहों पर सलामी स्लाइसिंग रणनीति का इस्तेमाल किया गया था।

क्या कहता है कानून?

अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय नौसेना के जहाज और पाकिस्तानी नौसेना के जहाज के बीच टक्कर ने समुद्र में पाकिस्तान के व्यवहार और भारत-पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली के व्यापक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह घटना 1999 के लाहौर घोषणापत्र में किए गए एक महत्वपूर्ण लेकिन अधूरे वादे को भी फिर से चर्चा में लाती है। इस घोषणापत्र में दोनों देशों की नौसेना और वायु सेना से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए एक समझौते पर चर्चा करने का आह्वान किया गया था। ऐसे समझौते का उद्देश्य उनके सैन्य बलों के बीच दुर्घटनाओं, गलत अनुमानों और खतरनाक टकरावों की संभावना को कम करना था।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें- 'आक्रामक और गैर पेशेवर...', अरब सागर में कैसे टकरा गए भारत-पाकिस्तान के युद्धपोत?