नई दिल्ली [जागरण स्‍पेशल]। सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों के साथ लगभग एक हजार छात्रों और शिक्षकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ई-सिगरेट तथा निकोटीन उपलब्ध कराने वाले इस तरह की अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में लोगों ने कहा है कि किशोरों के बीच इन उत्पादों के नुकसानदेह प्रभावों के बारे में गलत सूचना है। वे इन्हें 'मज़ेदार उपकरण' मानते हैं।

छात्रों ने कहा, 'हमलोग स्कूली छात्र हैं और नये तरह के उत्पाद के बारे में बहुत अधिक चिंतित हैं, जिसे ई-सिगरेट कहा जाता है। यह हमारे साथियों के बीच खतरनाक तरीके से लोकप्रिय हो रही है। हमें पता चला है कि 13 साल तक के बच्चे ई-सिगरेट को मस्ती के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं और धीरे-धीरे इसके आदी हो जाते हैं। इसके नुकसानदेह प्रभावों के बारे में माता-पिता और शिक्षकों के बीच गलत सूचना है।'

डिप्रेशन और हार्ट अटैक का खतरा
यूनिवर्सिटी ऑफ कंस के द्वारा किए गए अध्‍ययन में ई सिगरेट का सेवन करने से व्यक्ति को डिप्रेशन होने की संभावना दोगुनी हो जाती है। इस स्टडी ने उन सभी दावों को खारिज कर दिया जो इस बात की पैरवी कर रहे थे कि ई सिगरेट का सेवन सेहत के लिए सुरक्षित है। इस अध्‍ययन को व्यापक और सटीक बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने अमेरिका के उन 96,467 लोगों को शामिल किया जो ई सिगरेट का सेवन करते थे।

इस स्टडी के जो परिणाम आए वो काफी चिंताजनक रहे। शोध के मुताबिक जो लोग ई सिगरेट का सेवन करते हैं, उन्हे हार्ट अटैक से होने वाला खतरा 56 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वहीं लंबे समय तक इसका सेवन करने से खून के धक्‍का बनने की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।

ई-सिगरेट क्या होती है
ई-सिगरेट एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक इन्हेलर है, जिसमें निकोटीन और अन्य केमिकलयुक्त लिक्विड भरा जाता है। ये इन्हेलर बैट्री की ऊर्जा से इस लिक्विड को भाप में बदल देता है जिससे पीने वाले को सिगरेट पीने जैसा एहसास होता है। लेकिन ई-सिगरेट में जिस लिक्विड को भरा जाता है वो कई बार निकोटिन होता है और कई बार उससे भी ज्यादा खतरनाक केमिकल। इसलिए ई-सिगरेट को सेहत के लिहाज से बिल्कुल सुरक्षित नहीं माना जा सकता है।

इस तरह आई ई-सिगरेट
वर्ष 2003 में चीन में ई-सिगरेट का अविष्कार हुआ। यह बैटरी से चलने वाला निकोटिन डिलीवरी का यंत्र है। इसमें द्रव्य पदार्थ, जिसे भाप कहते हैं, को गर्म करने के बाद मुंह से खींचा जाता है। इसे यह सोचकर बनाया गया था कि बिना टॉर या कार्बन के फेफड़े तक कम मात्रा में निकोटिन जाएगा। व्यावसायिक फायदे के लिए ऐसे तरीके अपनाए गए, जिससे अधिक मात्रा में निकोटिन फेफड़े में जाने लगा।

क्या ई-सिगरेट सुरक्षित हैं?
ज्यादातर ई-सिगरेट्स में जो केमिकल भरा जाता है वो लिक्विड निकोटिन होता है। निकोटिन नशीला पदार्थ है इसलिए पीने वाले को इसकी लत लग जाती है। थोड़े दिन के ही इस्तेमाल के बाद अगर पीने वाला इसे पीना बंद कर दे, तो उसे बेचैनी और उलझन की समस्या होने लगती है। निकोटिन दिल और सांस के मरीजों के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं माना जा सकता है।

हो जाएंगे पॉपकॉन लंग्स से पीड़ित 
महानगरों में ई-सिगरेट एवं हुक्का बार का चलन तेजी से बढ़ा है। हुक्का बार में फ्लेवर्ड ई-लिक्विड होता है जबकि ई-सिगरेट में केमिकल वेपर के रूप में होता है। दोनों में हानिकारक डाई एसिटाइल केमिकल (बटर जैसा जो पॉपकॉन में मिलाते थे, अब प्रतिबंधित) होता है। इसके सेवन से फेफड़े में पॉपकॉन जैसा उभरने पर पॉपकॉन लंग्स कहते हैं। इस बीमारी को ब्रांक्योलाइटिस आब्लिट्रेंन कहा जाता है। इसमें फेफड़ों की छोटी श्वांस नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जो आगे चलकर आइएलडी में परिवर्तित हो जाती है। इसकी चपेट में आकर युवा एवं महिलाएं तेजी से फेफड़े की बीमारी का शिकार हो रहे हैं।

ई-सिगरेट के खतरे
युवाओं में ई-सिगरेट तेजी से पॉपुलर हो रहा है
ई-सिगरेट को बिल्कुल सुरक्षित नहीं माना जा सकता है
ई-सिगरेट में सामान्य सिगरेट की तरह तंबाकू का इस्तेमाल नहीं होता है
निकोटिन नशीला पदार्थ है इसलिए पीने वाले को इसकी लत लग जाती है
ई-सिगरेट की क्वाइल में हानिकारक मेटल

ई-सिगरेट के वेपर को गर्म करने के लिए क्वाइल का इस्तेमाल होता है। क्वाइल में निकोटिन, फार्मालडिहाइड, फेनाले, टिन, निकिल, कॉपर, लेड, क्रोमियम, आर्सेनिक एवं डाई एसेटाइल मेटल हैं।
 

 

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Posted By: Arun Kumar Singh