नई दिल्ली (पीटीआई)। नालंदा यूनिवर्सिटी के संचालक मंडल में अमर्त्य सेन को जगह नहीं दिए जाने के फैसले को राजनीति से प्रभावित न बताते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, किसी को भी स्कॉलर होने के साथ जवाबदेह भी होना चाहिए।

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ऑरोविले फाउंडेशन के चेयरमैन के तौर पर सीनियर कांग्रेस नेता, करण सिंह की दोबारा नियुक्ति के बारे में बताते हुए कहा कि सेन से संबंधित निर्णय राजनीति से प्रभावित नहीं था। ऑरोविले फाउंडेशन मानव संसाधन मंत्रालय के तहत काम करने वाली स्वायत्त संस्था है।

मंत्री ने बताया, 'हमने ऑरोविले फाउंडेशन में करण सिंह की स्कॉलर के आधार पर ही उन्हें दोबारा नियुक्त किया। मैं इसे स्पष्ट करना चाहता हूं कि इस मामले में जवाबदेही होनी चाहिए, चाहे वह स्कॉलर कितना भी बड़ा क्यों न हो।' उन्होंने आगे कहा, 'कोई यह नहीं कह सकता कि मैं जो चाहूं वही करूंगा, मुझे जरूरत है इसलिए पैसा दिया गया है लेकिन मैं आपको खर्च का विवरण नहीं दूंगा।'

एक इवेंट में नालंदा बोर्ड में दोबारा से सेन के नियुक्ति न किए जाने पर किए गए सवाल के जवाब में जावड़ेकर ने यह बयान दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका इशारा सेन की ओर है, तब उन्होंने कहा, 'मैंने किसी का नाम नहीं लिया।'

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हाल ही में नालंदा यूनिवर्सिटी तब विवादों में आ गई थी, जब सरकार ने संस्था के संचालक मंडल का दोबारा गठन किया था और सेन का नाम यहां से हटा दिया गया था। इसके तुरंत बाद नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे चांसलर जॉर्ज यो ने यह कहते हुए पद से इस्तीफा दे दिया कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को प्रभावित किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें संस्थान में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर नोटिस तक नहीं दिया गया।

हालांकि, जावड़ेकर ने इस बात पर जोर दिया कि इस निर्णय में उनका मंत्रालय शामिल नहीं है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नालंदा यूनिवर्सिटी एक्ट, 2010 के तहत संचालक मंडल के पुर्नगठन पर मुहर लगाई थी।

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Posted By: Monika minal

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