नई दिल्ली, प्रेट्र। मकर संक्रांति के अवसर पर शुक्रवार को भारत सहित दुनियाभर के एक करोड़ से अधिक लोगों ने मिलकर सूर्य नमस्कार किया। कोरोना महामारी के दौरान तन और मन को स्वस्थ रखने के लिए लोग इस कार्यक्रम से जुड़े। आयुष मंत्रालय ने कहा, केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और आयुष राज्य मंत्री डा.महेंद्र मुंजपारा ने आनलाइन रूप से कार्यक्रम की मेजबानी की।

सोनोवाल ने कहा, आयुष मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। कार्यक्रम में शामिल हर व्यक्ति मानवता की सेवा में मदद कर रहा है। सभी प्रतिभागियों को मेरा धन्यवाद। योग गुरु बाबा रामदेव, पतंजलि आयुर्वेद के सीईओ आचार्य बालकृष्ण, आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर, ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरु जग्गी वासुदेव सहित दुनिया की कई हस्तियां कार्यक्रम से जुड़ी। देश की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे आजादी का अमृत महोत्सव के तहत इसका आयोजन किया गया।

इन बड़ी हस्तियों ने किया सूर्य नमस्कार

- जापान की मिस वर्ल्ड तमाकी होशी ने कहा कि आयुष मंत्रालय द्वारा की गई यह पहल इस महामारी के समय में हर इंसान के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है।

- योगगुरू बाबा रामदेव ने कहा कि सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को जीवन शक्ति के आधार से अवगत कराना है। योग का मतलब लोगों को एकजुट करना है और हम सूर्य नमस्कार करने वाले लोगों को एक साथ जोड़कर ऐसा ही कर रहे हैं।

- आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने कहा कि सूर्य की ऊर्जा से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जो हमें इस महामारी (कोरोना) से बचा सकती है। 

- ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरु जग्गी वासुदेव ने कहा कि दुनिया में सब कुछ सूर्य की ऊर्जा से संचालित होता है। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

'सूर्य नमस्कार को धर्म से न जोड़ें'

भाजपा के वरिष्ठ नेता कविंदर गुप्ता ने कहा कि वे नेता जो सरकार की सूर्य नमस्कार करने की अपील की निंदा कर रहे हैं, दरअसल वे लोगों के बीच वैमनस्य पैदा करने का बहाना खोज रहे हैं। इससे धार्मिक समुदायों के बीच भाईचारे को नुकसान पहुंच रहा है। सूर्य नमस्कार को अन्य व्यायामों के रूप में देखा जाना चाहिए और इसे धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए। गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया था कि मुसलमान छात्रों को मकर संक्रांति मनाने के लिए योग करने के लिए क्यों मजबूर किया जाना चाहिए? अब्दुल्ला के अलावा महबूबा मुफ्ती ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की थी।