नीलू रंजन, नई दिल्ली। कोरोना के ओमिक्रोन वैरिएंट ने भारत में भी दस्तक दे दी है। दक्षिण अफ्रीका से कर्नाटक पहुंचे दो यात्री इस वैरिएंट से संक्रमित पाए गए हैं। दोनों को आइसोलेशन में रखा गया है। उनके सभी प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्सियरी संपर्कों की पहचान कर ली गई है और उनकी टेस्टिंग की जा रही है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री डा.के सुधाकर ने एक ट्वीट कर बताया कि राज्य में ओमिक्रोन से संक्रमित जो दो लोग मिले उनमें से 66 वर्षीय व्यक्ति दक्षिण अफ्रीका का नागरिक है और वह वापस अपने देश लौट गया। वहीं, 46 वर्षीय दूसरा व्यक्ति भारतीय नागरिक व पेशे से डाक्टर है। उसकी कोई ट्रैवेल हिस्ट्री नहीं मिली है।

भारत में दूसरी लहर के दौरान तबाही मचाने वाले डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रोन वैरिएंट को पांच गुना ज्यादा संक्रामक बताया जा रहा है। लेकिन राहत की बात है कि पूरी दुनिया में इस वैरिएंट से अब तक मिले सभी संक्रमित मामले माइल्ड श्रेणी के पाए गए हैं। ऐसे में तत्काल लाकडाउन जैसे विकल्पों पर विचार से भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने मना किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि बुधवार की शाम आठ बजे तक 37 उड़ानों से आने वाले 7,976 का आरटी-पीसीआर टेस्ट किया गया। जिनमें 10 यात्री पाजिटिव पाए गए। इन सब के सैंपल की जिनोम सिक्वेंसिंग के बाद दो लोगों में ओमिक्रोन वैरिएंट पाया गया।

वैसे अग्रवाल ने यह नहीं बताया कि इन दोनों ने वैक्सीन ली थी या नहीं। इस तरह भारत, दुनिया का ऐसा 30वां देश बन गया जहां ओमिक्रोन पाया गया है। इसके पहले 29 देशों में ओमिक्रोन के 373 मामले मिल चुके हैं। इनमें सबसे अधिक द.अफ्रीका में 183, ब्रिटेन में 32, पुर्तगाल में 13, जर्मनी में 10 और घाना में 33 मामले हैं।

बहुत तेजी से फैलता है ओमिक्रोन

लव अग्रवाल ने अमेरिकी महामारी रोग विशेषज्ञ डाक्टर एरिक फीगल-डिंग द्वारा तैयार माडल का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआती ट्रेंड से ओमिक्रोन, डेल्टा वैरिएंट की तुलना में पांच गुना ज्यादा संक्रामक नजर रहा है। इसकी संक्रामकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 24 नवंबर को द.अफ्रीका और बोत्सवाना से इसके मरीज की सूचना विश्व स्वास्थ्य संगठन को मिली और आठ दिनों में यह 30 देशों में फैल गया।

ध्यान देने की बात है कि इस साल अप्रैल और मई महीने में डेल्टा ने भारत में बड़ी तबाही मचाई थी। डेल्टा से पांच गुना ज्यादा संक्रामक होना ओमिक्रोन को काफी खतरनाक बना रहा है।

डेल्टा की तुलना में कम घातक

राहत की बात बस यही है कि अभी तक दुनिया में ओमिक्रोन के सभी मामले माइल्ड किस्म के मिले हैं। इसकी चपेट में आए किसी भी मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ी है। चपेट आए लोगों में सामान्य रूप से बदन दर्द की शिकायत देखने को मिल रही है। लव अग्रवाल ने यह भी साफ किया कि अभी सीमित डाटा के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी।

ओमिक्रोन के मामले माइल्ड होने के बावजूद पिछले एक हफ्ते में दक्षिण अफ्रीका में कोरोना मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने के बढ़ते आंकड़े खतरनाक संकेत दे रहे हैं। अग्रवाल ने कहा कि यह देखना पड़ेगा कि ओमिक्रोन के मामले बढ़ने से अस्पतालों में मरीज बढ़े है या किसी और कारण से।

फिर से टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट और आइसोलेशन पर बढ़ेगा जोर

ओमिक्रोन ने एक बार फिर से पहली और दूसरी लहर की तरह टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट और आइसोलेशन को अनिवार्य कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ओमिक्रोन का तेजी से फैलना तय है। सरकार ने एक बार फिर से राज्यों को टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट और आइसोलेशन को कड़ाई से पालन करने के लिए कह दिया है।

ओमिक्रोन को फैलने से रोकने में फिजिकल डिस्टेसिंग (उचित शारीरिक दूरी) कारगर हथियार साबित हो सकती है। अग्रवाल ने बताया कि फिजिकल डिस्टेसिंग के नियम का पालन नहीं करने का नतीजा अमेरिका, यूरोप समेत दुनिया के अन्य भागों में देखा जा सकता है।

वैक्सीन अब भी कारगर

ओमिक्रोन में एक साथ 45 से 52 परिवर्तनों में इस पर वैक्सीन की कारगरता पर सवाल खड़ा कर दिया है। दुनिया की अधिकांश वैक्सीन कोरोना के स्पाइक प्रोटीन पर आधारित हैं, जबकि ओमिक्रोन वैरिएंट में स्पाइक प्रोटीन में ही 26 से 32 परिवर्तन देखे जा रहे हैं। नीति आयोग के सदस्य और टीकाकरण पर गठित टास्क फोर्स के प्रमुख डाक्टर वीके पाल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा वैक्सीन भी ओमिक्रोन से बचाव में सक्षम है। वैक्सीन से बनने वाली टी-सेल रिस्पांस ओमिक्रोन के मामले में मरीजों की स्थिति गंभीर होने से बचा सकती है। इसीलिए उन्होंने सभी लोगों को तत्काल टीके की दोनों डोज लगाने की जरूरत बताई।

कोवैक्सीन हो सकती है ज्यादा कारगर

ओमिक्रोन के खिलाफ भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन ज्यादा कारगर साबित हो सकती है। आइसीएमआर के महानिदेशक डाक्टर बलराम भार्गव के अनुसार कोवैक्सीन पूरे वायरस से बनी वैक्सीन है और वैज्ञानिक रूप से पूरे वायरस से बनी वैक्सीन किसी भी वैरिएंट के खिलाफ ज्यादा कारगर मानी जाती है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कहा कि ओमिक्रोन के खिलाफ सभी वैक्सीन की कारगरता की नए सिरे से जांच करने की जरूरत है।

बूस्टर डोज फिलहाल नहीं

ओमिक्रोन वैरिएंट ने देश में बूस्टर डोज की जरूरत को बढ़ा दिया है हालांकि डा.वीके पाल ने फिलहाल इससे साफ इन्कार कर दिया है। उन्होंने कहा कि देश में टीकाकरण एक वैज्ञानिक तरीके से चल रहा है। नए वैरिएंट के बावजूद इसमें फिलहाल बदलाव की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले सभी वयस्क जनसंख्या को टीके की दोनों डोज लगाने की जरूरत है। उन्होंने कोविशील्ड के दोनों डोज के बीच की समय सीमा को घटाने की जरूरत से इन्कार कर दिया।