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'ईश्वर' या 'सत्यनिष्ठा' के अलावा किसी अन्य नाम पर ली गई शपथ अमान्य: केरल हाई कोर्ट

Published: Wed, 24 Jun 2026 07:21 PM (IST)

केरल हाईकोर्ट ने जनप्रतिनिधियों द्वारा कानूनन निर्धारित प्रारूप से हटकर ली गई शपथ को अमान्य घोषित किया है।

केरल हाई कोर्ट की शपथ को लेकर टिप्पणी (जागरण)

केरल हाई कोर्ट की शपथ को लेकर टिप्पणी (जागरण)

HighLights

  1. केरल हाईकोर्ट ने निर्धारित शपथ प्रारूप से हटकर ली गई शपथ अमान्य ठहराई।

  2. 20 भाजपा पार्षदों और एक पंचायत सदस्य की शपथ रद की गई।

  3. जनप्रतिनिधियों को चार हफ्तों में दोबारा शपथ लेने का मौका मिला।

डिजिटल डेस्क, तिरुवनंतपुरम। केरल हाई कोर्ट ने लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा को सर्वोपरि रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा कानूनन तय प्रारूप से हटकर ली गई कोई भी शपथ कानूनी रूप से मान्य नहीं होगी। जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन की एकल पीठ ने तिरुअनंतपुरम निगम के 20 भाजपा पार्षदों और पलक्कड़ जिले के एक पंचायत सदस्य की शपथ को अमान्य घोषित कर दिया है।

इन सदस्यों ने 'ईश्वर' या 'सत्यनिष्ठा' के निर्धारित शब्दों के बजाय स्थानीय देवी-देवताओं, 'भारत माता', राजनीतिक आंदोलनों में प्राण गंवाने वाले अपने नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के नाम पर शपथ ली थी।

कोर्ट ने भावपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि शपथ केवल एक रस्म नहीं, बल्कि जनता के प्रति एक पवित्र वादा है कि जनप्रतिनिधि संविधान और कानून के शासन को बनाए रखेगा।

भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और महान संत श्री नारायण गुरु के संदेशों का स्मरण कराते हुए कोर्ट ने कहा कि नागरिक किसी भी रूप में ईश्वर को मानने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन जब बात कानून की स्थापित प्रक्रिया की हो, तो उसमें अपनी तरफ से नए शब्द जोड़ना या बदलाव करना स्वीकार्य नहीं है।

लोकतंत्र का सम्मान और नया मौका

आइएएनएस के अनुसार, इस कानूनी चूक के बावजूद, कोर्ट ने जनता के लोकतांत्रिक जनादेश का पूरा सम्मान किया है। कोर्ट ने पार्षदों के चुनाव को रद करने से इन्कार करते हुए उन्हें अपनी गलती सुधारने का एक और मौका दिया है।

संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन सभी प्रभावित जनप्रतिनिधियों के लिए आगामी चार हफ्तों (एक महीने) के भीतर कानून के दायरे में दोबारा शपथ लेने की व्यवस्था की जाए।

चूंकि इन सदस्यों ने ऐसा जानबूझकर नहीं बल्कि कानूनी वैधता के विश्वास में किया था, इसलिए उन पर कोई जुर्माना या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

कार्यों की वैधता पर कानूनी पेंच

इस फैसले में तिरुअनंतपुरम के पार्षदों और ग्राम पंचायत सदस्य के बीच एक तकनीकी अंतर भी सामने आया। केरल नगर पालिका अधिनियम की धारा 531 के तहत तिरुअनंतपुरम के भाजपा पार्षदों द्वारा अब तक किए गए सभी प्रशासनिक कार्यों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है, यानी उनके कार्य वैध रहेंगे।

दूसरी ओर, वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत के सदस्य के मामले में पंचायत राज अधिनियम के तहत ऐसी कोई सुरक्षात्मक धारा न होने के कारण, उनके द्वारा अब तक किए गए कार्यों को अमान्य करार दिया गया है।

बहरहाल, दोबारा शपथ लेने के बाद वे सभी सामान्य रूप से अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे। यह ऐतिहासिक निर्णय याद दिलाता है कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए भी कानून की तय मर्यादा को लांघा नहीं जा सकता।

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