नई दिल्ली, सीमा झा। एक समय था, जब लोग प्लस साइज महिलाओं को देखकर शक्ल बनाते थे, उनके बारे में भद्दे कमेंट्स करते थे। बाहरी ही नहीं, उन्हें घर में भी अपमानित होना पड़ता था। उन्हें तरह-तरह के ताने सुनने पड़ते थे। जैसे-तुमसे शादी कौन करेगा। ऐसी महिलाएं अपने शरीर की बनावट को लेकर परेशान रहती थी या उन्हें खुद पर शर्म आती थी। ऐसी महिलाओं में आत्मविश्वास की कमी भी देखी जाती थी, लेकिन बदलते समय के साथ अब लोगों की सोच भी बदल रही है। अब इन महिलाओं को अपने शरीर पर शर्म नहीं, बल्कि गर्व होता है। ये महिलाएं मॉडलिंग में भी अपनी पहचान बना रही हैं।

ज्यादा वक्त नहीं हुआ, जब अमेरिकी प्लस साइज मॉडल तेस होलिडे और जेसामाइन ने अपने इंस्टाग्राम से सुंदरता की पुरानी तयशुदा परिभाषा बदल डाली। आज से नौ साल पहले यानी 2010 में जब इन प्लस साइज मॉडल्स ने अपनी तस्वीरें डालीं तो, उनके प्रशंसकों की संख्या देखकर सबके होश उड़ गए। लोग अब मानने लगे कि स्त्री की सुंदरता बस छरहरा, तराशा हुआ और सुडौल शरीर होने के खांचे में ही फिट नहीं है, बल्कि इससे बाहर जाकर भी कोई स्त्री सबको अपनी सुंदरता से चौंका सकती है। इन दोनों मॉडल्स ने उन महिलाओं को बड़ी राहत दी, जो लंबे समय से मोटापे और अनगढ़ शरीर की वजह से कुंठित महसूस कर रही थीं। दरअसल, उनके लिए मोटा, अनगढ़ शरीर होने का अर्थ सुंदर न होना था।

अब केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि भारत जैसे विकासशील देश में भी प्लस साइज मॉडल खूब दिख रही हैं। प्लस साइज यानी चौड़ी कमर और बड़े बट के साथ वे कंफर्ट महसूस करती हैं। कर्वी और स्लिम न होने का उन्हें जरा भी दुख नहीं है। वे अब अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर खुद को पैंपर करती नजर आती हैं और उनके इसी अंदाज के ढेरों दीवाने हैं। खुद से प्यार का असर इतना है कि उनकी फैन फॉलोइंग भी अच्छी-खासी है। केवल प्लस साइज मॉडल्स की ही बात क्यों करें, अब तो उन महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है, जो प्लस साइज को अपना यूएसपी बना रही हैं। कोई बॉडी पॉजिटिव ब्लॉगर है, तो कोई कर्वी स्टाइलिस्ट। जैसा कि कर्वी स्टाइलिस्ट सोनल सोमानी कहती हैं, उन्हें प्लस साइज होने पर गर्व है। वे अपने शरीर से बहुत प्यार करती हैं और अपने जैसी महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं।

फ्लैट बेली न हुई तो क्या हुआ
सोशल मीडिया पर एक्टिव सेलेब्रिटी महिलाओं को देखने का असर यह हुआ कि अब आम महिलाएं भी मोटी या अनगढ़ होकर शर्म महसूस नहीं करतीं। उन्हें इस बात का मलाल नहीं कि उनके पास फ्लैट बेली वाला शरीर नहीं है। उन्हें जीरो साइज होने का शौक नहीं, बल्कि वे जान गईं हैं कि फ्लैट बैली या जीरो साइज होना ही उन्हें सुंदर कहलाने के लिए जरूरी नहीं। कुल मिलाकर, अब वे परफेक्ट नहीं होना चाहतीं।

फैशन ब्रांड भी सक्रिय
सुंदरता को लेकर बदले मिजाज का प्रभाव यह हुआ कि अब बड़े फैशन ब्रांड भी साइज ऑप्शन को बढ़ा रहे हैं और प्लस साइज का चलन बढ़ा है। अब जिस तरह से प्लस मॉडल खूब प्रसिद्धि पा रही हैं, पिछले कुछ सालों में ऐसी मॉडलिंग एजेंसीज की संख्या भी बढ़ी है।

नजरिया बदल सकता है विज्ञापन
स्त्रियां अपने शरीर को कैसे देखती हैं? यह सवाल बड़ा असर पैदा कर सकता है। सेक्स रोल्स नामक जर्नल में प्रकाशित एक हालिया स्टडी के मुताबिक, ' प्लस साइज मॉडल्स के बाद पतली लड़कियों को देखकर कम असंतोष महसूस होता है। इस स्टडी के मुताबिक, विज्ञापनों में यदि प्लस साइज मॉडल दिखाई जाती हैं तो, यह तरीका अपने शरीर को लेकर निगेटिव सोच के प्रभाव को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। इसी तरह की एक और शोध के मुताबिक, टीवी पर भी प्लस साइज मॉडल्स को देखकर ऐसी महिलाओं को सुकून मिल सकता है।

फ्लोरिडा स्टेट यूनिसर्सिटी के डिपॉर्टमेंट ऑफ रिटेल, मर्केंटाइजिंग ऐंड प्रोडक्ट डेवलपमेंट की असिसटेंट प्रोफेसर जेसिका रिगवे क्लेटॉन कहती हैं, 'विज्ञापनों से महिलाओं को अपनी बॉडी इमेज को लेकर खास मनोवैज्ञानिक मदद मिलती है। वे अपने शरीर को लेकर थोड़ा वास्तविकता से जुड़ पाती हैं, इसकी देखभाल को लेकर सजग हो पाती हैं। बहरहाल कुछ भी हो, लेकिन यह तो तय है कि आत्मविश्वास की यहां भी बड़ी भूमिका है।

सुंदरता की पुरानी या रूढ़ परिभाषा पूरी तरह बदल जाए, यह जरूरी नहीं, लेकिन सदियों से चलती आई सोच बुरा प्रभाव तब तक नहीं डाल सकती, जब तक आप अपने शरीर को प्यार करते हैं या खुद से प्यार करते हैं। जैसा कि प्लस साइज मॉडल पायल सोनी कहती हैं, यदि आप आत्मविश्वास से भरे हैं तो हर बॉडी बिकनी पहनने के लायक है। समय अब बदल रहा है, बदल रही सुंदरता की परिभाषा।

Posted By: Arti Yadav

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