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'राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं, स्टारलिंक को लाइसेंस न दें', स्वदेशी जागरण मंच की केंद्र सरकार से अपील

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:45 PM (IST)

स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने केंद्र सरकार से एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने की अनुमति नहीं देने की मांग की है।

स्वदेशी जागरण मंच की अपील- एलन मस्क को न दें लाइसेंस

स्वदेशी जागरण मंच की अपील- एलन मस्क को न दें लाइसेंस

HighLights

  1. स्वदेशी जागरण मंच ने स्टारलिंक लाइसेंस का विरोध किया।

  2. राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का समाधान आवश्यक बताया।

  3. भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक घरेलू गेटवे से गुजरे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने केंद्र सरकार से भारत में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने की अनुमति नहीं देने की मांग की है।

मंच ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं होने तक कंपनी को लाइसेंस नहीं दिया जाना चाहिए। उसने उद्योगपति मुकेश अंबानी और परोक्ष रूप से सरकार को लेकर मस्क की टिप्पणियों को भी गैर-जिम्मेदाराना बताया।

मस्क ने शेयर किए थे स्क्रीनशॉट

मस्क ने हाल में इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर ऐसी खबरों के स्क्रीनशाट साझा किए थे, जिनमें रिलायंस से जुड़ी कंपनियों और भाजपा के इंटरनेट मीडिया अभियानों के बीच संबंधों तथा राजनीतिक चंदे को लेकर आरोप लगाए गए थे।

इससे पहले उन्होंने अंबानी को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहकर निशाना साधा था और उन पर एकाधिकार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। स्टारलिंक की भारतीय सेवाओं को मंजूरी मिलने में देरी भी उनके निशाने पर रही है।

रिलायंस ने आरोपों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी है। दूसरी ओर, सरकार ने दूरसंचार और उपग्रह सेवाओं के लिए अनुमति की व्यवस्था को निष्पक्ष और भेदभावरहित बताया है तथा चुनिंदा कंपनियों के खिलाफ नियम लागू करने के आरोपों को निराधार कहा है।

एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने कहा कि स्टारलिंक ने भारत में सेवाएं शुरू करने के लिए लाइसेंस का आवेदन किया है, लेकिन उसे अभी मंजूरी नहीं मिली है। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय मस्क सार्वजनिक बयान देकर भारतीय कारोबारियों और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा नियामकीय जरूरतों से निराशा के कारण हो सकता है।

महाजन के मुताबिक, अलगाववादी गतिविधियों, आतंकी घटनाओं, दंगों और विरोध-प्रदर्शनों जैसी स्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाएं बाधित करनी पड़ सकती हैं। ऐसे में उपग्रह इंटरनेट के संचालन और निगरानी की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता जरूरी है।

उन्होंने स्टारलिंक के उपग्रहों के बीच लेजर लिंक को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक देश के भीतर स्थित गेटवे से गुजरे बिना विदेशी बुनियादी ढांचे तक पहुंच सकता है, जिससे कानूनी निगरानी और कार्रवाई मुश्किल हो सकती है। मंच का जोर है कि भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक देश के भीतर के गेटवे से होकर गुजरे।

उन्होंने कहा कि एसजेएम ने 5जी नेटवर्क के परीक्षणों में चीनी कंपनियों हुवावे और जेडटीई की भागीदारी का भी सुरक्षा कारणों से विरोध किया था। महाजन के अनुसार, स्टारलिंक को अनुमति नहीं देने का अर्थ यह नहीं है कि भारत उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं से वंचित रह जाएगा।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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