'FCRA संशोधन बिल में UPA के दौर के कानूनी प्रविधान', अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के आरोप को सरकार ने किया खारिज
संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने बताया कि एफसीआरए संशोधन विधेयक में यूपीए सरकार के 2010 के कानून के प्रमुख प्रविधान शामिल हैं।

FCRA में यूपीए सरकार ने 2010 में बनाए गए कानून में शामिल -भाजपा सांसद संजय जायसवाल
HighLights
एफसीआरए संशोधन विधेयक में यूपीए के पुराने प्रावधान शामिल हैं।
संयुक्त संसदीय समिति ने विभिन्न धार्मिक समूहों से चर्चा की।
सरकार ने अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के आरोप खारिज किए।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि प्रस्तावित कानून के प्रमुख प्रविधानों में वही धाराएं हैं, जिन्हें यूपीए सरकार ने 2010 में बनाए गए कानून में शामिल किया था।
समिति की बैठक के बाद मंगलवार को भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने बताया कि बैठक में समिति ने हिंदू, ईसाई और अन्य समूहों के साथ बातचीत की और प्रस्तावित कानून पर उनके विचार सुने। कुछ वर्गों और विपक्षी दलों की ओर से इस विधेयक का कड़ा विरोध किया जा रहा है।
UPA सरकार के समय के प्रविधान
जायसवाल ने कहा कि 2010 के कानून के तहत, एफसीआरए के अंतर्गत विदेशी धन पाने वाले किसी गैर-सरकारी संगठन के कामकाज में अनियमितताएं मिलने पर उसकी संपत्तियां जब्त करने का अधिकार केंद्रीय गृह सचिव और राज्य के प्रधान सचिव को दिया गया था। नए विधेयक में यही अधिकार एक नामित प्राधिकारी को देने का प्रस्ताव है।
जायसवाल ने कहा, 'यूपीए सरकार के कानून में तय किया गया था कि एफसीआरए के तहत अनियमितताएं मिलने पर सभी संपत्तियां संबंधित केंद्रीय गृह सचिव या राज्य के प्रधान सचिव को सौंप दी जाएंगी। हालांकि, अब इस व्यवस्था की जगह एक नामित प्राधिकारी होगा।'
जायसवाल ने कहा कि मंगलवार को समिति के सामने अपनी राय रखने वालों में सिरो-मालाबार चर्च, रामकृष्ण मठ और इस्कान के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। उन्होंने कहा, 'हमने ध्यान से सुना कि हर किसी ने क्या कहा। जब हम समिति की बैठक में बैठेंगे, तो इन मुद्दों पर चर्चा करेंगे। हमने सभी की बात सुनी है और इसके बाद समिति की बैठक में इन सभी बिंदुओं पर विचार-विमर्श करेंगे। फैसले हम मिलकर लेंगे।'
विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और 12 अगस्त को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया। विपक्षी दलों ने यह भी आरोप लगाया था कि एफसीआरए विधेयक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता है।
भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है और विपक्षी दलों को चुनौती दी है कि वे ऐसा एक भी प्रविधान बताएं जो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करता हो।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म विशेष से संबंधित नहीं और इसका उद्देश्य विदेशी अंशदान को विनियमित करना है।
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