जागरण संवाददाता, मुंबई। दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के फैसलों का असर अन्य राज्यों में भी दिखने लगा है। आप से सीख लेते हुए महाराष्ट्र की कांग्रेस-राकांपा सरकार ने भी सोमवार को बिजली दरों में 20 फीसद कटौती करने की घोषणा की। विपक्षी दल राज्य सरकार के इस कदम को चुनावी स्टंट करार दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने एक लोकलुभावन फैसला करते हुए सितंबर 2013 में बढ़ाई गई बिजली की दरों में 20 फीसद कटौती करने का निर्णय लिया। मुंबई महानगर को छोड़कर शेष महाराष्ट्र में सरकार के इस निर्णय का लाभ घरेलू, औद्योगिक, वाणिज्यिक एवं कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं को मिलेगा।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह छूट 300 यूनिट तक बिजली का उपभोग करनेवालों को मिलेगा। उक्त चारों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को यह छूट देने के लिए राज्य सरकार को प्रतिमाह 706 करोड़ रुपए का भुगतान विद्युत वितरण कंपनियों को करना पड़ेगा। मुंबई के लिए भी बिजली दरों में छूट की घोषणा सरकार जल्द ही करनेवाली है। सरकार के इस फैसले को चुनाव की दृष्टि से उठाया गया कदम नहीं मानती।

मुख्यमंत्री चह्वाण के अनुसार बिजली दरों में कटौती का यह निर्णय राज्य के उद्योग मंत्री नारायण राणे की अध्यक्षता में बने एक अध्ययन दल की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है, जबकि करीब 20 दिन पहले मुंबई के कांग्रेस सांसद संजय निरुपम ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मुंबई में बिजली दरें कम करने की मांग की थी।

दो दिन पहले निरुपम कांग्रेस की ही एक अन्य सांसद प्रियादत्त के साथ मिलकर बिजली कंपनियों के खिलाफ प्रदर्शन भी कर चुके हैं।

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