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'हम खुद ऑफिस जाकर देखेंगे NTA का सिस्टम' NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट का अहम बयान

Published: Fri, 18 Sep 2026 04:27 PM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 04:30 PM (IST)

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नीट में ढांचागत सुधारों पर नंदन नीलेकणि पैनल इस महीने के अंत तक अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सौंपेगा।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नीट में ढांचागत सुधारों का सुझाव देने के लिए गठित नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाले उच्चाधिकार प्राप्त पैनल ने अपनी व्यापक चर्चा पूरी कर ली है। केंद्र ने अदालत को आश्वस्त किया है कि पैनल इस महीने के अंत तक अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सौंपने की संभावना है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ को बताया कि सुधारों से जुड़े सभी सुझाव पैनल के समक्ष रख दिए गए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नंदन नीलेकणि पैनल ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन के नेतृत्व वाली पिछली समिति के सदस्यों के साथ भी विस्तृत विचार-विमर्श किया है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के उस संयुक्त सचिव को अदालत में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है, जो नीलेकणि पैनल की सहायता कर रहे हैं। इस हलफनामे में अब तक उठाए गए सभी कदमों का ब्योरा देना होगा।

व्यवस्था को संस्थागत बनाने पर सुप्रीम कोर्ट का जोर

पीठ ने सॉलिसिटर जनरल मेहता से कहा कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार को राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया को संस्थागत बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

पीठ ने स्पष्ट करते हुए कहा कि आपको यह पता होना चाहिए कि पूरी व्यवस्था का स्थायी होना ही मूल कुंजी है। इसमें एक स्थायी सेटअप, स्थायी कर्मचारी और स्थायी वर्टिकल्स होने चाहिए। प्रतिनियुक्ति पर काम करने वाले लोग बहुत कम होने चाहिए। जब यह सब होगा, तभी एक स्थायी और मजबूत ढांचा सामने आएगा।

NTA के नए सिस्टम का दौरा करना चाहते हैं जज

सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि वह और जस्टिस अराधे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की नई और अपग्रेड की गई फैसिलिटी का व्यक्तिगत तौर पर दौरा करना चाहेंगे, ताकि वहां के सिस्टम और व्यवस्था का परीक्षण किया जा सके।

शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया है कि एक नया अपग्रेड किया गया सिस्टम तैयार कर लिया गया है। इस पर मेहता ने अदालत को बताया कि ढांचे की कार्यप्रणाली का स्थायी होना सुनिश्चित कर लिया गया है। हालांकि, इस समय मानव संसाधनों की केवल आंशिक रूप से ही व्यवस्था हो पाई है।

अगस्त में दिए गए थे निर्देश

इससे पहले 19 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट ने NTA में सुधारों को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता पर जोर दिया था। अदालत ने केंद्र सरकार को यह बताने का निर्देश दिया था कि राधाकृष्णन पैनल और नीलेकणि समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

बता दें कि शीर्ष अदालत उन याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही है, जिसमें फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की ओर से वकील तन्वी दुबे द्वारा दायर की गई याचिका भी शामिल है।

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