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अमेरिका से चीन भेजे गए थे GoPro कैमरे, लश्कर आतंकियों तक कैसे पहुंचे? पहलगाम हमले पर NIA की चार्जशीट में खुलासा

Published: Sun, 24 May 2026 05:19 PM (IST)Updated: Sun, 24 May 2026 05:28 PM (IST)

एनआईए पहलगाम आतंकी हमले में इस्तेमाल हुए अमेरिकी GoPro कैमरे के आतंकियों तक पहुंचने की जांच कर रही है, जो मूल रूप से चीन भेजा गया था।

NIA की जांच में बड़ा खुलासा- लश्कर आतंकियों तक पहुंचा GoPro कैमरा

NIA की जांच में बड़ा खुलासा- लश्कर आतंकियों तक पहुंचा GoPro कैमरा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक ऐसा सुराग मिला है, जिसने आतंकियों तक पहुंचने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच एजेंसी अब इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि अमेरिका में बना GoPro कैमरा, जिसे आधिकारिक तौर पर चीन भेजा गया था, आखिर लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकियों के हाथों तक कैसे पहुंचा।

सूत्रों के मुताबिक, यह हाई-टेक कैमरा उन आतंकियों के पास से बरामद हुआ था, जिन्हें पिछले साल जुलाई में डाचीगाम के जंगलों में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था। यही आतंकी 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन मैदान में हुए नरसंहार में शामिल थे, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इनमें ज्यादातर पर्यटक थे।

आतंकियों तक कैसे पहुंचा GoPro कैमरा?

जांच में सामने आया कि आतंकी हमले को रिकॉर्ड करने और बाद में प्रचार सामग्री तैयार करने के लिए GoPro कैमरे का इस्तेमाल कर रहे थे।

पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठन हमलों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर उन्हें सोशल मीडिया और प्रोपेगेंडा के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे दहशत फैलाने और भर्ती बढ़ाने की कोशिश की जाती है।

NIA ने जब कैमरे की तकनीकी जांच कराई तो पता चला कि यह डिवाइस अमेरिका की कंपनी GoPro Inc ने चीन स्थित एक अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर को भेजा था। इसके बाद एजेंसी ने इस पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू कर दी।

चीन से पाकिस्तान और फिर आतंकियों तक पहुंचा कैमरा

जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि कैमरा संभवतः चीन से पाकिस्तान पहुंचा और वहां से लश्कर आतंकियों को उपलब्ध कराया गया।

एजेंसियां इस संभावना की भी जांच कर रही हैं कि ऐसे उपकरण पाकिस्तान की सेना या उससे जुड़े नेटवर्क ने खरीदे हों और बाद में आतंकी संगठनों तक पहुंचाए हों।

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'चार्जशीट में बैसरन हमले की तत्काल ऑपरेशनल डिटेल्स शामिल हैं, लेकिन असली नेटवर्क अभी भी जांच के दायरे में है। हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि चीन तक ट्रेस होने वाला यह कमर्शियल डिवाइस प्रतिबंधित आतंकी संगठन तक कैसे पहुंचा।'

चीन से कानूनी मदद मिलना चुनौती

भारत और चीन के बीच Mutual Legal Assistance Treaty (MLAT) नहीं होने के कारण जांच एजेंसियों को इस तरह के मामलों में कानूनी सहायता सीधे नहीं मिल पाती।

ऐसे मामलों में कूटनीतिक माध्यमों से जानकारी जुटानी पड़ती है। यही वजह है कि NIA अब विदेश मंत्रालय और अन्य एजेंसियों के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानकारी इकट्ठा कर रही है।

पहलगाम हमले के बाद चला था 'ऑपरेशन सिंदूर'

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन मैदान में आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दी थीं। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी।

घटना के बाद भारत सरकार ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में सक्रिय आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कई कैंप तबाह किए गए थे।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, हमले के बाद तीनों आतंकी पहलगाम के जंगलों से होते हुए भाग निकले थे। माना जा रहा है कि उन्हें करीब 40 मिनट का समय मिल गया था, क्योंकि शुरुआती दौर में सुरक्षाबलों को हमले की भयावहता का अंदाजा नहीं था।

बाद में डाचीगाम के जंगलों में सेना के विशेष बलों ने मुठभेड़ में तीनों आतंकियों को मार गिराया। उनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी के रूप में हुई।

चीनी मूल के AK-47 भी बरामद

जांच के दौरान बैसरन हमले की जगह से बरामद दो AK-47 राइफल और डाचीगाम से मिली एक अन्य राइफल भी चीनी मूल की पाई गई। इससे आतंकियों को मिल रही विदेशी सहायता और हथियारों के नेटवर्क को लेकर जांच और गहरी हो गई है।

NIA ने अपनी चार्जशीट में दो स्थानीय लोगों बशीर अहमद जोठात और परवेज अहमद को भी आरोपी बनाया है। जांच में सामने आया कि हमले से एक दिन पहले इन दोनों ने आतंकियों को खाना, ठिकाना और जरूरी सामान उपलब्ध कराया था।

आरोप है कि आतंकियों को हल्दी, मिर्च, नमक, खाना पकाने के बर्तन, कंबल और तिरपाल तक दिए गए थे। बाद में डाचीगाम मुठभेड़ स्थल से बरामद कंबल की DNA जांच में पुष्टि हुई कि वह बशीर के घर से लिया गया वही कंबल था।

CCTV खराब होने से जांच में आई दिक्कत

प्रारंभिक जांच में एक शोपियां नंबर की गाड़ी संदिग्ध रूप से पहलगाम से बाहर जाती दिखाई दी थी, लेकिन आगे उसका कोई सुराग नहीं मिला।

अधिकारियों के मुताबिक, इलाके के कई CCTV कैमरे खराब थे, जिससे आतंकियों की मूवमेंट को ट्रैक करने में मुश्किल आई।

NIA ने लश्कर-ए-तैयबा के कथित कमांडर साजिद जट्ट उर्फ साजिद जुत्त के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी अब इस पूरे मॉड्यूल के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन, फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट की जांच कर रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि GoPro कैमरे से जुड़ा यह सुराग सिर्फ एक डिवाइस की कहानी नहीं, बल्कि उस बड़े नेटवर्क की तरफ इशारा करता है जो आधुनिक तकनीक, विदेशी हथियार और संसाधन आतंकियों तक पहुंचा रहा है।

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