नई दिल्ली, प्रेट्र। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पर्यावरण के खिलाफ अपराध को हमला जितना ही गंभीर बताते हुए सोमवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को निर्देश दिया कि ई-कचरे का निपटारा वैज्ञानिक तरीके से सुनिश्चत कराए।

एनजीटी के अध्यक्ष एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ई-कचरा संबंधी नियमों का ठीक से अनुपालन नहीं हो रहा है तथा उच्च अधिकारियों को नागरिकों की परेशानी की कोई खास चिंता नहीं है। यह स्थिति स्पष्ट तौर पर शासन की कमजोरी दर्शाती है।

पीठ ने कहा कि इस मामले में समन्वित प्रयास की जरूरत है तथा यह तब तक नहीं हो सकता, जब तक कि उच्च स्तरीय निगरानी तथा नेतृत्व उपलब्ध नहीं हो। इसे निचले स्तर के भरोसे छोड़ देने या सिर्फ कागजी निर्देश जारी कर देने से स्थिति में कोई सुधार नहीं आने वाला है। दुर्भाग्यवश पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन पर ध्यान नहीं दिया जाता है और ऐसी उपेक्षा महंगी पड़ सकती है।

एनजीटी ई-कचरे का अवैज्ञानिक तरीके से निपटारा किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।

पर्याप्त रूप से नहीं फैलाई गई जागरुकता

पीठ ने कहा कि गरीब मजदूर लोग छोटे से लाभ के लिए इलेक्ट्रॉनिक तार या अन्य कचरे को जलाकर उससे धातु निकालते हैं। यह उनके तथा अन्य लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। इसे रोकने के लिए पर्याप्त रूप से जागरूकता नहीं फैलाई गई है।

अधिकरण ने कहा कि सीपीसीबी को चाहिए कि हर छह माह में कम से कम एक बार स्थिति की समीक्षा करे तथा प्राप्त रिपोर्टो के आधार पर उचित निर्देश जारी करे। आवासीय क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर ई-कचरा के अवैज्ञानिक प्रबंधन का संज्ञान लेते हुए कहा कि ऐसे स्थलों पर सतत विशेष निगरानी की जरूरत है।

रामगंगा के किनारे से ई-कचरा को किया जाए शिफ्ट

एनजीटी ने उत्तर प्रदेश के लिए गठित निगरानी कमेटी की सिफारिशें स्वीकार करते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शोधन, भंडारण तथा निष्पादन सुविधाएं स्थापित करने का निर्देश दिया। उसने यह भी कहा कि पर्यावरण का ध्यान रखते हुए रामगंगा के किनारे से ई-कचरा को शिफ्ट किया जाना चाहिए। रामगंगा का किनारा साफ होना चाहिए तथा वहां ई-कचरा या काला पावडर जमा नहीं हो।

दिल्ली के संबंध में भी एनजीटी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी से कहा कि वह दिल्ली पुलिस तथा पूर्वी दिल्ली नगर निगम समेत अन्य संबंधित अथारिटी से ई-कचरा प्रबंधन के लिए और अधिक समन्वय बढ़ाए। सभी राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डो को भी हॉटस्पाट को चिह्नित कर उसकी सतत निगरानी के लिए स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन से समन्वय करने की जरूरत है ताकि पर्यावरण तथा जन स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को नियमों के सार्थक पालन करा कर रोका जा सके।