नई दिल्‍ली, जेएनएन। कोरोना संक्रमण की पहली लहर का बच्चों व किशोरों पर प्रभाव न के बराबर रहा, लेकिन दूसरी लहर उनके लिए खतरनाक साबित हो रही है। बड़ी संख्या में मासूम व किशोर कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। एहतियातों के साथ लंबे अरसे बाद स्कूल खुले, लेकिन बढ़ते संक्रमण के कारण उन्हें फिर से बंद करना पड़ा। बच्चों का कोरोना संक्रमित होना समाज और देश के लिए ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि अब तक उनके लिए वैक्सीन भी नहीं आई है। आइए जानते हैं कि बच्चे दूसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमण की चपेट में क्यों आ रहे हैं और कैसे उन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है..

क्या उम्र से पड़ता है अंतर

विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड संक्रमण के लिए अब उम्र की सीमा नहीं रह गई है। एक से 16 साल तक के किसी भी उम्र के बच्चे या किशोर को कोरोना संक्रमण हो सकता है। ऐसे भी मामले सामने आए हैं कि नवजात भी कोरोना संक्रमित पाया गया है। जन्म के समय ही बच्चे में मां से कोरोना वायरस पहुंच चुका था। अब अगर अंतर की गुंजायश रह गई है तो वह है बीमारी की गंभीरता की। जिन बच्चों की इम्युनिटी कमजोर है और गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं उन्हें कोरोना संक्रमण के बाद अधिक जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।

बच्चों से फैल सकता है कोरोना

कई अध्ययन इस बात का इशारा करते हैं कि बच्चों से कोरोना संक्रमण का प्रसार हो सकता है। चूंकि ज्यादातर बच्चों में कोरोना संक्रमण के हल्के लक्षण दिखाई देते, इसलिए उन्हें वायरस का साइलेंट स्प्रेडर यानी अज्ञात प्रसारक माना जा सकता है। इस समय जबकि कोरोना संक्रमण के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, कई विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे वायरस के सुपर स्प्रेडर हो सकते हैं और वे वयस्कों को भी संक्रमित कर सकते हैं।

वयस्कों से अलग हैं बीमारी के लक्षण

कोरोना वायरस दो लोगों में एक ही प्रकार के लक्षण नहीं छोड़ता। यह बात बच्चों पर भी लागू होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों में कोरोना संक्रमण के लक्षण वयस्कों से अलग होते हैं। हालांकि, कोरोना संक्रमण के कई लक्षण दूसरे संक्रमण की तरह हैं, इसलिए अभिभावकों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चों में संक्रमण के लक्षण बहुत हल्के रूप में दिखाई देते हैं, लेकिन वे लंबे समय तक पीड़ित रह सकते हैं। इसलिए, जरूरी है कि बच्चों को हल्का बुखार हो तब भी डॉक्टर को जरूर दिखाएं। अन्य लक्षणों में पेट में संक्रमण, शरीर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, नाक बहना आदि शामिल हैं। ऐसे लक्षण नवजात में भी दिखाई दे सकते हैं।

अभी मासूम और किशोरों के लिए नहीं आई है वैक्सीन, रहना होगा ज्यादा सतर्क

विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत इसलिए भी है, क्योंकि उनके लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं आई है। दूसरी तरफ, कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड में कई बदलाव हो चुके हैं और नए वैरिएंट एंटीबॉडी और प्रतिरक्षा प्रणाली को झांसा देने में सक्षम हो गए हैं। वायरस से जुड़े स्पाइक प्रोटीन भी आक्रामक हो गए हैं। इसलिए कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ज्यादा तेजी से फैल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस में जितना ज्यादा म्युटेशन होगा और जितने अधिक नए वैरिएंट आएंगे बच्चों के लिए खतरा उतना बढ़ता जाएगा। उदाहरण के लिए भारत के डबल म्यूटेंट वैरिएंट से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों व किशोरों के संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है।

संक्रमण की पुष्टि पर क्या करें

विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आपको अपने बच्चे में कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखाई दें तो उसे तत्काल आइसोलेशन में भेजें और जांच करवाएं। ज्यादातर बच्चों में कोरोना संक्रमण का असर कम होता है और वे घर पर भी जल्द ठीक हो जाते हैं। अभिभावकों के लिए बच्चों को अकेले छोड़ना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में बच्चे के कमरे में जाने से पहले दो फेसमास्क व ग्लव्स का इस्तेमाल करें। बातचीत के दौरान कम से कम दो मीटर की दूरी बनाए रखें।

इन वैरिएंट से खतरा ज्यादा

शुरुआती दौर में पाया गया था कि वयस्कों के मुकाबले बच्चों को कोरोना संक्रमण का खतरा कम होता है। उन्हें सहरुग्णता का भी खतरा कम होता है। लेकिन, कोरोना की दूसरी लहर ने इस अवधारण को ध्वस्त कर दिया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि बी.1.1.7 (ब्रिटेन) व बी.1.617 (भारत) वैरिएंट बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है। इन वैरिएंट का देश में अब व्यापक प्रसार हो चुका है।

मास्क पहनने की आदत डालें

बच्चे जब भी घर से बाहर निकलें तो उन्हें मास्क पहनने के लिए कहें। बार-बार हाथ धोने अथवा सैनिटाइज करने की आदत डालें। फिलहाल पार्क आदि सार्वजनिक जगहों पर भेजने से परहेज करें।

क्या है एमआइएस-सी

यह कोविड-19 से जुड़ी दुर्लभ जटिलता है, जिसे मल्टीसिस्टम इंफ्लैमेटरी सिंड्रॉम कहा जाता है। बच्चे जब कोरोना से उबर जाते हैं तब उनमें यह जटिलता पैदा हो सकती है। इसके आम लक्षणों में सांस अटकना, दुविधा व शरीर में दर्द आदि शामिल हैं।

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