UPI पर 15 अक्टूबर से लागू होगा MDR, आपकी जेब पर असर पड़ेगा या नहीं? जानिए 10 बड़ी बातें
15 अक्टूबर 2026 से 2000 रुपये से अधिक के कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।


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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जेब में न कैश रखने की झंझट, न छुट्टे की टेंशन, बस QR स्कैन किया, PIN डाला और हो गया पेमेंट! साल 2016 में लॉन्च हुए UPI ने देश में लेन-देन का तरीका ही बदल दिया।
सबसे बड़ी बात यह रही कि इसके लॉन्च से आज तक जनता के लिए यह सर्विस पूरी तरह फ्री रही। लेकिन, 15 अक्टूबर से UPI पेमेंट का यह नियम बदलने जा रहा है। जानिए किन मर्चेंट पेमेंट्स पर अब आपकी जेब पर असर पड़ सकता है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 2000 रुपये से ऊपर के कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू कर दिया है। 75000 रुपये और उससे ज्यादा के लेन-देन पर यह चार्ज अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
सबसे जरूरी बात यह है कि ग्राहक से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। यह चार्ज सिर्फ मर्चेंट इकोसिस्टम पर लगेगा। पर्सन-टू-पर्सन पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहेंगे और छोटे मर्चेंट भी सुरक्षित रहेंगे। सरकार के इस नए UPI फ्रेमवर्क को लेकर वो 10 बातें जो हर ग्राहक को जानना चाहिए।
1. क्या मुझे 15 अक्टूबर से UPI चार्ज देना होगा?
नहीं। नए MDR फ्रेमवर्क के तहत, ग्राहक बिना किसी ट्रांजैक्शन चार्ज के UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे। इस नियम का मतलब यह भी है कि UPI एप्स इन UPI पेमेंट पर कोई अलग प्लेटफॉर्म फीस या कोई और चार्ज नहीं जोड़ सकते।
इसलिए, अगर आप किसी दुकान पर QR कोड स्कैन करके अपने बैंक अकाउंट से ₹3000 का पेमेंट करते हैं, तो नए MDR का मतलब यह नहीं है कि आपके अकाउंट से ₹3,012 कटेंगे। यह चार्ज मर्चेंट (दुकानदार) पर लागू होगा।
2. नया 0.4 प्रतिशत MDR असल में क्या है?
MDR का मतलब है मर्चेंट डिस्काउंट रेट। यह डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने से जुड़ी एक फीस है। 15 अक्टूबर से, 2,000 रुपये से ज्यादा के खास 'पर्सन-टू-मर्चेंट' UPI ट्रांज़ैक्शन के लिए स्टैंडर्ड MDR 0.4 प्रतिशत होगा। 75,000 रुपये और उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए यह चार्ज ज्यादा से ज्यादा 300 रुपये तय किया गया है।
इसे ऐसे समझिए
3000 रुपये का पेमेंट: 12 रुपये का MDR
50000 रुपये का पेमेंट: 200 रुपये का MDR
1 लाख रुपये का पेमेंट: 0.4 प्रतिशत के हिसाब से 400 रुपये होते, लेकिन कैप की वजह से यह 300 रुपये तक ही सीमित रहेगा।
ये चार्ज मर्चेंट की तरफ से लगते हैं, न कि ग्राहकों को अलग से देने होते हैं।
3. क्या दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने पर कोई चार्ज लगेगा?
नहीं। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) UPI ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे। इसमें परिवार के सदस्यों को पैसे भेजना, दोस्त को पैसे चुकाना, बिल बांटना या अपने ही लिंक किए गए बैंक अकाउंट के बीच पैसे ट्रांसफर करना शामिल है। नया MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के लिए है, न कि आम लोगों के बीच बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर के लिए।
4. किसी दुकानदार को 2000 या उससे कम का पेमेंट करता हूं तो क्या होगा?
2000 रुपये तक के UPI पेमेंट स्टैंडर्ड MDR दायरे से बाहर रहेंगे। इसका मतलब है कि अगर कोई ग्राहक किसी मर्चेंट को 500, 1000 या 2000 रुपये का पेमेंट करता है, तो नए नियमों की वजह से उसे UPI ट्रांजैक्शन फीस नहीं देनी होगी। यह बदलाव ज्यादा कीमत वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर केंद्रित है।
5. छोटे दुकानदार का क्या होगा जिसे एक बार में ₹2000 से ज्यादा का पेमेंट मिलता है?
यहां पर महीने के हिसाब से मर्चेंट की लिमिट (थ्रेशोल्ड) अहम हो जाती है। नए नियमों के मुताबिक, UPI QR पेमेंट के जरिए महीने में ₹1 लाख तक पाने वाले छोटे मर्चेंट जीरो MDR के तहत काम करते रहेंगे।
इसलिए, अगर कोई दुकानदार तय 'छोटे मर्चेंट' कैटेगरी में आता है, तो वह ₹2000 से ज्यादा का एक पेमेंट ले सकता है और फिर भी स्टैंडर्ड MDR के दायरे से बाहर रह सकता है। यह बात खासकर सड़क किनारे सामान बेचने वालों, छोटे रिटेलर्स और माइक्रो बिजनेस के लिए अहम है।
6. क्या दुकानदार मेरे बिल में MDR जोड़ सकता है?
यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि मर्चेंट MDR का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डालें। बैंकों को यह पक्का करने की सलाह दी गई है कि मर्चेंट नए चार्ज को UPI यूजर्स पर न डालें। ग्राहकों से उम्मीद की जाती है कि वे प्रोडक्ट या सर्विस की तय कीमत ही चुकाएं। इसलिए, अगर किसी प्रोडक्ट की कीमत ₹5000 है, तो ग्राहक से सिर्फ इसलिए ₹5020 देने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए क्योंकि पेमेंट UPI से किया जा रहा है।
क्या इस नई लागत से मर्चेंट की कीमतें बड़े पैमाने पर बदलेंगी, यह एक अलग सवाल है। रिटेलर्स एसोसिएशन ने पहले ही चिंता जताई है कि इस अतिरिक्त लागत की वजह से कुछ छोटे बिजनेस डिजिटल पेमेंट के बारे में दोबारा सोच सकते हैं। उदाहरण के लिए, रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का तर्क है कि MDR कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे रिटेलर्स पर दबाव डाल सकता है और कुछ ट्रांजैक्शन को वापस कैश में बदलने के लिए बढ़ावा दे सकता है।
7. क्या फ्री UPI ट्रांजैक्शन पर कोई मासिक लिमिट होगी?
नहीं। ऐसा कोई नया महीने का कोटा नहीं है जिसके तहत एक निश्चित संख्या में ट्रांजैक्शन के बाद UPI पर अचानक चार्ज लगने लगे। ग्राहक बिना किसी मंथली कमर्शियल फीस लिमिट की चिंता किए P2P और P2M UPI ट्रांजैक्शन करते रह सकते हैं।
8. UPI ऑटोपे, SIP और OTT सब्सक्रिप्शन का क्या होगा?
यह उन क्षेत्रों में से एक है जहां यूजर्स शायद बिना वजह परेशान हो रहे थे। नए नियमों के तहत UPI ऑटोपे और बार-बार होने वाले UPI मैंडेट पर तय MDR लागू नहीं होता है। इसमें OTT सब्सक्रिप्शन, यूटिलिटी बिल और बार-बार होने वाले निवेश जैसे पेमेंट शामिल हैं।
हालांकि, UPI के जरिए किए जाने वाले कुछ कैपिटल-मार्केट ट्रांजैक्शन के लिए एक अलग दर है। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े पेमेंट पर 0।02% का MDR लगेगा, जिसकी सीमा प्रति ट्रांजैक्शन ₹300 तय की गई है।
9. क्या मुझे इंश्योरेंस, फ्यूल, रेलवे टिकट या यूटिलिटी बिल के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे?
सिर्फ MDR की वजह से नहीं। कई सेक्टर के लिए स्टैंडर्ड 0।4% MDR के बजाय एक अलग फ्लैट-रेट स्ट्रक्चर तय किया गया है। ₹2000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए, रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी कैटेगरी पर फ्लैट ₹5 का MDR लगेगा।
बिजली और पानी के बिल जैसे यूटिलिटी पेमेंट पर भी ₹2000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए ₹5 का रियायती स्ट्रक्चर लागू होगा। फिर से बता दें कि यह ₹5 मर्चेंट-साइड MDR है। इसे कस्टमर पर अतिरिक्त चार्ज के तौर पर नहीं लगाया जाना चाहिए।
10. UPI MDR अभी क्यों शुरू किया गया है?
यहीं पर बहस कुछ रुपयों से आगे बढ़ जाती है। UPI कंज्यूमर और बिजनेस के लिए एक जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बन गया है। NPCI के आंकड़ों से पता चलता है कि UPI ने अगस्त 2026 में 24.5 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जो इस सिस्टम के बड़े पैमाने पर काम करने को दिखाता है।
उस इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी से बचाव, क्षमता और भरोसेमंदता में निवेश की जरूरत होती है।
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