30 लाख का जुर्माना-3 साल की जेल: प्रोडक्शन से लेकर डिलीवरी तक रहेगी नजर, कौन-सा कानून ला रही सरकार?
केंद्र सरकार किसानों को नकली और घटिया बीजों से बचाने के लिए एक नया और सख्त सीड एक्ट ला रही ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। किसानों के भरोसे के साथ वर्षों से खिलवाड़ कर रहे नकली और घटिया बीज कारोबार पर अब निर्णायक कार्रवाई की तैयारी है। केंद्र सरकार बजट सत्र में लगभग सात दशक पुराने सीड एक्ट को बदलकर एक ऐसी आधुनिक और सख्त व्यवस्था लाने जा रही है, जिसमें गुणवत्ता, जवाबदेही और पारदर्शिता को सबसे ऊपर रखा गया है।

नए कानून के तहत बिना पंजीकरण किसी भी बीज कंपनी, उत्पादक या विक्रेता को बीज बेचने की अनुमति नहीं होगी और जानबूझकर घटिया बीज बेचने वालों को तीन वर्ष तक की जेल और 30 लाख रुपये तक जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल विधायी परामर्श के लिए विधेयक को सार्वजनिक किया गया है और किसान संगठनों एवं हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।

पूरी श्रृंखला को जवाबदेह बनाया जाएगा
1966 में बना मौजूदा सीड एक्ट उस दौर का कानून था, जब न डिजिटल निगरानी की व्यवस्था थी और न ही बाजार इतना जटिल था। दोषियों पर सिर्फ पांच सौ रुपये के जुर्माने का प्रविधान था। नतीजा हुआ कि नकली बीज बेचने जैसे गंभीर अपराध पर भी कार्रवाई के नाम पर मामूली जुर्माना भरकर बच निकलने की प्रवृत्ति बनी रही। इसी कमजोरी को दूर करते हुए सरकार एक ऐसे कानून की ओर बढ़ रही है, जिसमें बीज आपूर्ति की पूरी श्रृंखला को जवाबदेह बनाया जाएगा।
नए सीड बिल की सबसे बड़ी खासियत बीजों की ट्रेसिबिलिटी व्यवस्था है। बाजार में बिकने वाले हर बीज का डिजिटल रिकॉर्ड होगा। पैकेट पर क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करते ही पता चल सकेगा कि वह कहां उत्पादित हुआ, किस इकाई में प्रसंस्कृत हुआ और किस विक्रेता के माध्यम से किसान तक पहुंचा। इस व्यवस्था के लागू होते ही नकली और खराब बीज लंबे समय तक बाजार में टिक नहीं पाएंगे और दोषी की पहचान तुरंत संभव होगी।

सख्ती के साथ संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का जोर इस बात पर है कि बीज केवल कृषि इनपुट नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका के साथ खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। इसलिए बीज कंपनियों, प्रसंस्करण इकाईयों, डीलरों और पौध नर्सरियों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाया जा रहा है। इससे न केवल फर्जी कंपनियों पर लगाम लगेगी, बल्कि किसानों को भी भरोसा मिलेगा कि वे अधिकृत और भरोसेमंद स्त्रोत से बीज खरीद रहे हैं।
सख्ती के साथ संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश की गई है। नया कानून किसानों की परंपरागत बीज प्रणाली में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। किसान अपने बीज बो सकेंगे। लेन-देन भी कर सकेंगे। गांवों में बीज विनिमय परंपरा भी सुरक्षित रहेगी। कार्रवाई सिर्फ उन्हीं पर होगी, जो नकली और घटिया बीज का कारोबार करेंगे। प्रस्तावित विधेयक में जुर्माने और सजा को प्रभावी बनाकर संदेश दिया गया है कि किसान को नुकसान पहुंचाना अब कम जोखिम वाला अपराध नहीं रहेगा।
