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NEET एग्जाम में Good Marks लेकिन अच्छा कॉलेज मिलना अब मुश्किल! इंटरनेट पर छात्रों ने पूछे सवाल तो NTA ने दी ये सफाई

मेडिकल में दाखिले से जुड़ी परीक्षा नीट (नेशनल एलिजबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट) में इस बार रैंक में आया भारी उछाल छात्रों के बीच परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर संदेह को और बढ़ा रहा है। खासबात यह है कि रैंक में भी यह उछाल कोई एक-दो गुना नहीं बल्कि पांच से छह गुना तक देखने को मिल रहा है। वहीं एनटीए की ओर से भी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं आया।

By Jagran News Edited By: Nidhi Avinash Published: Tue, 11 Jun 2024 07:54 PM (IST)Updated: Tue, 11 Jun 2024 10:30 PM (IST)
NEET एग्जाम में Good Marks लेकिन अच्छा कॉलेज मिलना अब मुश्किल! (Image: Jagran)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मेडिकल में दाखिले से जुड़ी परीक्षा नीट (नेशनल एलिजबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट) में इस बार रैंक में आया भारी उछाल छात्रों के बीच परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर संदेह को और बढ़ा रहा है। यह इसलिए भी है क्योंकि जिस नंबर पर छात्रों को अब इस परीक्षा में एक ऐसी रैंक मिल जाती थी, जिसके आधार पर वह एक बेहतर संस्थान में दाखिला पा लेते है, वह इस बार बिल्कुल नहीं है।

रैंक में भी पांच गुना उछाल

खासबात यह है कि रैंक में भी यह उछाल कोई एक-दो गुना नहीं बल्कि पांच से छह गुना तक देखने को मिल रहा है। फिलहाल एनटीए की ओर से इन सवालों का संतोषजनक जवाब न दे पाने से छात्रों का आक्रोश थमने का बिल्कुल नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन देश के कई हिस्सों में देखने को मिला है।

कमेटी के गठन के बाद भी संदेह 

इस बीच छात्रों की ओर इंटरनेट मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म और ईमेल के जरिए परीक्षा को लेकर की जा रही शिकायतों पर एनटीए की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है। इतना ही नहीं, ग्रेस मार्क देने से जुडे विषय की फिर से समीक्षा के लिए एनटीए ओर से एक कमेटी के गठन का ऐलान तो किया गया है लेकिन उसकी ओर से कमेटी के सदस्यों का नाम न बताने से यह संदेह और गहरा रहा है।

परीक्षा में नहीं हुई कोई गड़बड़ी

सूत्रों की मानें तो एनटीए ने अपनी टीम से ही कुछ सभी लोगों को कमेटी में रखा है। हालांकि एनटीए परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। उसका कहना है कि मेरिट में बढ़ोत्तरी के पीछे छात्रों को ग्रेस मार्क देना है। जो करीब 16 सौ छात्रों को दिया गया है। वहीं छात्रों का कहना है कि सिर्फ 16 सौ छात्रों को ग्रेस मार्क देने से पूरी मेरिट में पांच से छह गुना की बढ़ोत्तरी नहीं हो सकती है। इसमें गड़बड़ी हुई है। फिर से परीक्षा कराई जाए।

पिछले तीन सालों से नीट की तैयारी कर रहे छात्र विक्रांत का कहना है कि इस बार उन्हें 720 में से 650 अंक मिले है, लेकिन उनकी मेरिट करीब 30 हजार है। ऐसे उन्हें इस बार भी कोई अच्छा कालेज मिलना मुश्किल है। पिछले साल में इतने अंक पाने वाले की मेरिट सात हजार के आसपास थी। नीट की तैयारी करने वाले छात्रों का कहना है कि इस बार 625 अंक पाने वालों की मेरिट इस बार 50 हजार के आसपास गई है। ऐसे में इतने नंबर लाने के बाद भी इस बार सरकारी मेडिकल कालेज में दाखिला मिलना मुश्किल है।

नीट में 67 छात्रों को टापर घोषित, क्या है माजरा?

बढ़ी मेरिट का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि इस पर नीट में 67 छात्रों को टापर घोषित किया गया है। यानी 67 छात्रों ने एक बराबर अंक हासिल किए है। विरोध कर रहे है छात्रों का संदेह एक साथ इतने टापरों ने भी बढाया है। गौरतलब है कि एनटीए ने हाल ही में इन पूरे विवाद पर अपनी सफाई दी थी और कहा था कि छात्रों की संख्या बढ़ेगी तो मेरिट भी बढ़ेगी। साथ ही ग्रेस मार्क पर भी स्थिति स्पष्ट की थी और कहा था कि सिर्फ छह केंद्रों के 1563 छात्रों को परीक्षा में कम समय दिए जाने के चलते उन्हें हुए नुकसान की भरपाई के लिए ग्रेस मार्क दिए गए है।

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