पुणे से जुड़े NEET पेपर लीक के तार, एडमिशन दिलाने का झांसा देने वाला डॉक्टर गिरफ्तार; अब तक 15 दबोचे
NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद कर दी गई है, जिसके तार पुणे से जुड़े हैं और कई राज्यों में फैले हैं।
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यह फोटो एआई से बनाई गई है।
HighLights
NEET - UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के कारण रद
पुणे से आयुर्वेदिक डॉक्टर ओंकार शिंगोटे गिरफ्तार
महाराष्ट्र और राजस्थान से कुल 15 आरोपी दबोचे गए
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। NEET-UG 2026 की परीक्षा मंगलवार को रद कर दी गई। यह कदम पेपर लीक के आरोपों के बाद उठाया गया। जिसके बारे में कहा जा रहा है कि, यह महाराष्ट्र के पुणे से शुरू होकर कई राज्यों में फैल गया था। जानकारी के अनुसार, पुणे में ही सबसे पहले यह पेपर नासिक के रहने वाले और बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) के छात्र शुभम खैरनार को बेचा गया था।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), जिसने केंद्र सरकार के निर्देश पर इस मामले की जांच अपने हाथ में ली है। उन्होंने पुणे से एक और आरोपी ओंकार शिंगोटे (एक आयुर्वेदिक डॉक्टर) को हिरासत में लिया है। पुणे के जुन्नार इलाके का रहने वाला शिंगोटे कुछ समय से पुणे पुलिस की निगरानी में था।
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जांचकर्ताओं को शक है कि वह और उसका दोस्त धनंजय लोखंडे, जिसे अहिल्यानगर से हिरासत में लिया गया है। वह छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने में मदद करता थे। जांच एजेंसियां इस कथित रैकेट से जुड़े और भी लोगों का पता लगाने के लिए फिलहाल शिंगोटे से गहन पूछताछ कर रही हैं। धनंजय लोखंडे महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के राहुरी का रहने वाला है और पुणे से भागने के बाद वहीं छिपा हुआ था।
महाराष्ट्र से 5 आरोपी गिरफ्तार
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, धनंजय के साथ-साथ पुणे पुलिस ने मनीषा वाघमारे नाम की एक महिला को भी हिरासत में लिया है, जो पेशे से एक ब्यूटीशियन है। इस नई गिरफ्तारी के साथ, महाराष्ट्र में इस मामले से जुड़े आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इनमें से एक को नासिक में गिरफ्तार किया गया, एक को अहिल्यानगर में हिरासत में लिया गया, जबकि तीन अन्य को पुणे में हिरासत में लिया गया।
राजस्थान के सीकर और जयपुर में भी कार्रवाई
इसके अलावा अन्य मीडिया रिपोर्ट की माने तो NEET-UG का पेपर कथित तौर पर यश यादव के जरिए राजस्थान पहुंचा था; जो कि विकास बिवाल का परिचित था। पुलिस ने बताया कि विकास के पिता दिनेश बिवाल ने प्रश्न पत्र की हार्ड कॉपी को स्कैन किया था। इसके बाद उसे PDF फाइलों में बदला और सीकर के कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले छात्रों के बीच उसे बांट दिया।
छात्रों ने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्होंने इस पेपर के लिए 2 से 5 लाख रुपये के बीच की रकम चुकाई थी। पुलिस सूत्रों ने आगे दावा किया कि राकेश मांडवारिया, जो कि कोचिंग हब वाले इस शहर में 'RK कंसल्टेंसी' नाम से एक करियर गाइडेंस सेंटर चलाता है। उसने दिनेश और मांगीलाल से 15 लाख रुपये में यह पेपर खरीदने की बात कबूल कर ली है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि दिनेश और मांगीलाल कथित तौर पर खेती-बाड़ी की पृष्ठभूमि वाले प्रॉपर्टी डीलर हैं। राजस्थान के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने इस मामले में अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कथित मास्टरमाइंड मनीष यादव और राकेश मांडवारिया भी शामिल हैं।
