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देश में NEET पेपर लीक का शोर, हिमाचल को याद आए पुराने 'पेपर चोर'; युवाओं का सिस्टम से उठ रहा भरोसा

Published: Thu, 14 May 2026 10:23 AM (GMT+05:30)

नीट-यूजी विवाद के बीच हिमाचल के पुराने भर्ती घोटालों की यादें ताजा हो गई हैं, जिनमें सीपीएमटी, पुलिस कांस्टेबल और जेओए-आईटी पेपर लीक प्रमुख हैं।

सीपीएमटी पेपर लीक मामला तोड़ चुका है युवाओं का भरोसा (फाइल फोटो)

सीपीएमटी पेपर लीक मामला तोड़ चुका है युवाओं का भरोसा (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सीपीएमटी पेपर लीक ने युवाओं का भरोसा तोड़ा।

  2. पुलिस कांस्टेबल भर्ती में लाखों में बिके प्रश्नपत्र।

  3. जेओए-आईटी लीक से कर्मचारी चयन बोर्ड भंग।

चैतन्य ठाकुर, शिमला। देशभर में मचे नीट-यूजी पेपर लीक विवाद ने हिमाचल के पुराने भर्ती और प्रवेश परीक्षा घोटालों की याद ताजा करवा दी है। कभी मेडिकल कालेज में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षा का पेपर बिका तो कभी सरकारी नौकरी के सपने लाखों रुपये में बेचे दिए।

सीपीएमटी, पुलिस कोन्स्टेबल भर्ती और जेओए-आइटी पेपर लीक जैसे मामलों ने यह साबित किया कि हिमाचल की परीक्षा प्रणाली लंबे समय से संगठित माफिया और अंदरूनी मिलीभगत के निशाने पर रही है।

सीपीएमटी पेपर लीक मामले में उस समय कई तथाकथित टापर अभ्यर्थी जांच के घेरे में आए। आरोपों के अनुसार कुछ कारोबारी परिवारों और डाक्टर, अफसरों व तत्कालीन राजनेता के रिश्तेदारों तक के नाम सामने आए। यही वह मामला था जिसने पहली बार यह अहसास करवाया कि हिमाचल जैसे शांत राज्य में भी पैसे दो और सीट लो का खेल जड़ें जमा चुका है।

हिमाचल में पेपर लीक के सबसे पुराने मामलों में सीपीएमटी पेपर लीक मामला शामिल है। वर्ष 2004 और 2006 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक होने के आरोप लगे थे। उस दौर में यह मामला उत्तर भारत के सबसे बड़े शिक्षा घोटालों में गिना गया।

जांच में हिमाचल, उतर प्रदेश, बिहार, पंजाब और चंडीगढ़ तक फैले नेटवर्क का पता चला। कई कोचिंग सेंटर जांच के दायरे में आए। 120 आरोपितों के खिलाफ पुलिस में चार्जशीट दाखिल की गई है और जुलाई में इस मामले से जुड़े एक आइपीएस अफसर की ओर से अदालत में इस मामले में जवाब दिया जाएगा। आरोप था कि परीक्षा से पहले ही चुनिंदा अभ्यर्थियों को हल प्रश्नपत्र पहुंचाए गए।

कोन्स्टेबल भर्ती पेपर लीक मामला, वर्दी के सपनों का हुआ था सौदा

27 मार्च 2022 को कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक घोटाला तब फूटा जब दस्तावेज सत्यापन के दौरान धर्मशाला में कई अभ्यर्थी बेहद सामान्य सवालों के जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद जो खुलासे हुए उन्होंने पूरे प्रदेश को हिला दिया। जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र तीन से पांच लाख रुपये तक में बेचे गए।

अभ्यर्थियों को गुप्त ठिकानों में बैठाकर उत्तर रटाए गए। करीब 1.25 करोड़ रुपये के लेनदेन के सुबूत मिले। यह नेटवर्क हिमाचल से निकलकर बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तराखंड तक फैला हुआ था।

एसआइटी और बाद में सीबीआइ जांच में 90 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। अभ्यर्थियों से लेकर बिचौलियों, कोचिंग सेंटर संचालकों और नेटवर्क आपरेटरों तक पर शिकंजा कसा गया। मार्च 2024 में सीबीआइ ने 88 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

जेओए-आइटी पेपर लीक: पूरा आयोग ही करना पड़ा था बंद

दिसंबर 2022 में राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड हमीरपुर का जेओए-आइटी पेपर लीक मामला सामने आया। इसने प्रदेश की भर्ती व्यवस्था की जड़ें हिला दीं। आयोग की तत्कालीन वरिष्ठ सहायक उमा आजाद की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही बाहर पहुंच चुका था।

जांच में आयोग के भीतर से ही पेपर लीक होने के संकेत मिले। उमा आजाद के घर से नकदी और भर्ती से जुड़े दस्तावेज बरामद होने की बात सामने आई। इसके बाद क्लर्क, कंप्यूटर आपरेटर, स्टेनो टाइपिस्ट, लाइनमैन, फायरमैन और जेई समेत कई भर्ती परीक्षाएं जांच के घेरे में आ गईं। मामला इतना गंभीर हुआ कि तीन मार्च 2023 को राज्य सरकार को पूरा बोर्ड ही भंग करना पड़ा।