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नीट मामले में टेलीग्राम vs सरकार: Whatsapp-Facebook छोड़ सरकार ने सिर्फ Telegram ही क्यों किया बैन? सामने आई वजह

Published: Thu, 18 Jun 2026 05:21 PM (GMT+05:30)Updated: Thu, 18 Jun 2026 06:14 PM (GMT+05:30)

नीट पेपर लीक मामले में भारत सरकार ने टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थाई रोक लगा दी है, क्योंकि ऐप ...और पढ़ें

(जागरण ग्राफिक्स)

(जागरण ग्राफिक्स)

HighLights

  1. सरकार ने नीट पेपर लीक के चलते टेलीग्राम पर रोक लगाई।

  2. टेलीग्राम ने बैन को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

  3. ऐप पर संदिग्ध चैनलों पर कार्रवाई न करने का आरोप है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत सरकार ने नीट पेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए बुधवार को टेलीग्राम पर अस्थाई रोक लगा दी। अब यूजर्स 22 जून तक टेलीग्राम एक्सेस नहीं कर पाएंगे। साथ ही सरकार ने 30 जून तक टेलीग्राम के एडिट फीचर को भी बंद करने का निर्देश दिया है। इतना सख्त कदम उठाने से पहले टेलीग्राम और सरकार के बीच कई विवाद सामने आये। इसपर एक नजर डालते हैं।

दस्तावेजों से पता चलता है कि सरकार ने टेलीग्राम को निजी तौर पर फटकार लगाई थी क्योंकि उसने कथित लीक पेपर बेचने वाले अकाउंट्स को एप से हटाया नहीं था। वहीं टेलीग्राम ने सरकार पर मीटिंग के रिकॉर्ड गलत तरह से पेश करने का आरोप लगाया। इन सबके बाद सरकार ने 22 जून तक देशभर में टेलीग्राम पर बैन लगा दिया।

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15 करोड़ से ज्यादा यूजर्स

हालांकि, टेलीग्राम ने बैन को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। कंपनी का कहना है कि बैन संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन करता है। भारत, टेलीग्राम का सबसे बड़ा बाजार है जहां इसके 15 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं।

बता दें सरकार ने NEET परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। मई में पेपर लीक की आशंका के चलते परीक्षा के नतीजे रद कर दिया गया था। अब यह परीक्षा 21 जून को दोबारा आयोजित की जा रही है।

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क्यों बैन नहीं किए चैनल?

IT मंत्रालय ने टेलीग्राम पर आरोप लगाया कि उसने 'NEET PAPER LEAKED' और 'Paper Leaked NEET' जैसे स्पष्ट रूप से संदिग्ध चैनलों पर कोई कार्रवाई नहीं की, जहां लोग पैसे लेकर पूरा पेपर देने का दावा कर रहे थे।

दो हफ्तों की बातचीत के बाद लगा बैन

रॉयटर्स के अनुसार, 16 जून को बैन का आदेश जारी किया गया था। इससे पहले दो हफ्तों तक IT मंत्रालय और टेलीग्राम अधिकारियों के बीच बैठकें और बातचीत चली। टेलीग्राम ने बाद में ईमेल में जवाब दिया कि उसे गैर-कानूनी कंटेंट से निपटने में सुस्ती का आरोप लगाए जाने पर हैरानी है। कंपनी ने दावा किया कि वह अपनी सेवा का दुरुपयोग किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि के लिए नहीं होने देती।

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टेलीग्राम की खासियतें बनीं विवाद 

टेलीग्राम के ग्रुप्स में 2 लाख तक सदस्य जुड़ सकते हैं, जबकि व्हाट्सएप की सीमा सिर्फ 1,024 है। इसके अलावा यूजर्स बिना फोन नंबर दिखाए चैट कर सकते हैं। इन्हीं सुविधाओं के कारण यह धोखाधड़ी और गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए पसंदीदा प्लेटफॉर्म बन गया है। हालांकि टेलीग्राम इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि वह गलत कंटेंट पर तुरंत कार्रवाई करता है।

पावेल डुरोव का तंज

टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव ने बैन को 'गलत' बताया है। उन्होंने कहा कि इससे आम यूजर्स को सजा मिल रही है जबकि असली अपराधी दूसरे प्लेटफॉर्म पर चले जाएंगे। कंपनी ने X पर पोस्ट कर तंज कसा, 'हर साल 3 लाख से ज्यादा लोग डूबने से मरते हैं। समाज को बचाने के लिए अब पानी पीना या रखना गैर-कानूनी कर दिया जाए।'

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मीटिंग के मिनट्स पर तनाव

3 जून को हुई बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया। टेलीग्राम ने आरोप लगाया कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी बातों को गलत तरीके से दर्ज किया गया। कंपनी ने 5 जून के ईमेल में स्पष्ट किया कि उसके पास पहले से ही कंटेंट मॉडरेशन के उपाय हैं, हालांकि और सुधार की जरूरत है। कोर्ट में दायर याचिका में टेलीग्राम ने सरकारी मिनट्स को “एकतरफा और गलत ब्यौरा” बताया।

बड़े स्तर का विवाद

NEET परीक्षा में 20 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होते हैं। नतीजे रद्द होने से राजनीतिक हलचल मच गई और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठी। यह मुकाबला टेक कंपनियों और मोदी सरकार के बीच हालिया टकराव की कड़ी है। इससे पहले X प्लेटफॉर्म के साथ भी कंटेंट हटाने को लेकर अदालती लड़ाई हुई थी।

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