यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 27, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
PMGDisha के तहत भारत में लगभग 20 करोड़ महिलाएं डिजिटल रूप से साक्षर: स्मृति ईरानी
भारत में तकरीबन 2 करोड़ महिलाओं को डिजिटल प्रक्रिया के जरिए साक्षात्कार किया गया है। बुधवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ...और पढ़ें

नई दिल्ली, पीटीआइ। भारत में तकरीबन 2 करोड़ महिलाओं को डिजिटल प्रक्रिया के जरिए साक्षात्कार किया गया है। बुधवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लांच की गई पीएमजी दिशा (PMGDisha) कार्यक्रम का शानदार असर दिख रहा है। डिजिटल साक्षरता को समर्पित पीएमजीदिशा कार्यक्रम (PMGDisha) के जरिए दो करोड़ महिलाओं को डिजिटल रूप से साक्षर होने का प्रमाणपत्र दिया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मिल रहा है फायदा
दरअसल, प्रधान मंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीदिशा) का उद्देश्य है कि भारत में रहने वाले ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को कंप्यूटर या स्मार्टफोन जैसे डिजिटल एक्सेस डिवाइस के जरिए लोगों को प्रशिक्षण दी जाए। प्रशिक्षण के दौरान लोगों को ई-मेल भेजने, इंटरनेट ब्राउज़ करने और सरकारी सेवाओं का फायदा लेने की शिक्षा दी जाती है। इसके जरिए लोग, एक-दूसरे को डिजिटल भुगतान भी कर सकते हैं।
पीपीई किट को बनाने वाले 75 प्रतिशत कर्मचारी महिलाएं हैं
दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलाग' में केंद्रीय मंत्री ने हिस्सा लिया। इस बैठक के दौरान एक सवाल के जवाब में ईरानी ने कहा कि भारत में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ कई अन्य मामलों पर काम किया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण का उद्धारण देते हुए स्मृति ईरानी ने आगे कहा कि जब भारत में कोविड-19 की वजह से लाकडाउन लगाया गया तो हमारे देश में एक भी पीपीई किट उपलब्ध नहीं था। जब पीपीई किट बनाने की शुरुआत हुई तो इस किट को बनाने वाले कर्मचारियों में लगभग 75 प्रतिशत महिलाएं थीं और केवल तीन महीनों में हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े निर्यातक बन गए।
महिला और पुरुष नेताओं के बीच है बड़ा अंतर
महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि हमारे देश में तकरीबन 66 लाख महिलाएं हैं जो कोविड-19 महामारी में सबसे पहले जानकारी देती हैं, चाहे वह डॉक्टर हों, नर्स हों, आशा कार्यकर्ता हों या फिर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हों।स्मृति ईरानी ने आगे कहा कि देश में महिलाओं के विकास को लेकर मौजूदा मोदी सरकार काफी गंभीर है।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री से जब पूछा गया कि लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने में एक पुरुष और एक महिला नेता की क्या भूमिका हो सकती है, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'एक पुरुष नेता आपको वहां ले जाता है जहां आप होना चाहते हैं और एक महिला नेता संभवतः आपको वहां ले जाती है जहां आपको होना चाहिए।'