नई दिल्ली/नोएडा (जागरण स्पेशल)। एक दशक बाद एक बार फिर अारुषि और हेमराज की मर्डर मिस्ट्री चर्चा में है। इसकी वजह है मामले की दोबारा जांच की संभावना, जो अब संभव हो सकती है। दरअसल, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम सुनवाई के दौरान आरुषि मर्डर मिस्ट्री में केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की याचिका स्वीकार कर ली है। सीबीआइ ने यह याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा राजेश और नूपुर तलवार को बरी किए जाने के खिलाफ दी थी। माना जा रहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को दोबारा मामले की जांच के लिए कह दिया तो जहां तलवार दंपती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, वहीं देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बनी आरुषि मर्डर पर से पर्दा उठ सकता है। 

15-16 मई, 2008 की रात में छिपा मर्डर का रहस्य
दरअसल, आरुषि मर्डर का रहस्य इस खुलासे पर टिका हुआ है कि आखिर नोएडा सेक्टर-25 स्थित जलवायु विहार के फ्लैट नंबर एल-32 में उस रात किया हुआ था? देश-दुनिया में चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पिता डॉ. राजेश और मां नूपुर तलवार को सबूतों के अभाव में बरी करने के पीछे यह वजह भी थी कि सीबीआइ जांच में यही नहीं पता कर पाई थी कि 15-16 मई, 2008 की रात में एल-32 में क्या हुआ था? जो पता भी किया वह आधा-अधूरा था। दरअसल, कोर्ट में पेश सारे सबूत परिस्थिति जन्य थे। 

हत्या का मकसद भी सीबीआइ नहीं साबित कर पाई

एक बार यूपी पुलिस और दो बार सीबीआइ जांच में यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया कि आखिर हत्या का मकसद क्या था? दो बड़े सवाल यह थे कि अगर ये किसी बाहरी शख़्स का काम था तो फिर वो चाहता क्या था? और अगर परिवार के सदस्य ने मारा तो उसका क्या मकसद था?

हत्या के समय घर पर ही थे माता-पिता

15-16 मई,2008 की रात मे अारुषि की हत्या के समय माता-पिता घर में ही मौजूद थे। सीबीआई के मुताबिक, अपराध स्थल की पूरी तरह सफाई की गई थी और किशोरी लड़की के शव को चिकित्सक राजेश और नूपुर तलवार ने अपराध की रात को साफ किया था।

हत्या के समय जाग रहे थे आरुषि के माता-पिता

जांच के दौरान अपराध स्थल की सफाई बात सामने आई थी। हैरानी की बात है कि जिस बिस्तर पर आरुषि का शव पाया गया था, उसपर एक भी सिलवट नहीं थी।

कई बार खोला बंद किया गया था राउटर

सीबीआई ने यह भी दलील दी थी कि सेवा प्रदाता के अनुसार इंटरनेट राउटर को वारदात की रात खोला-बंद किया गया था। इससे साफ जाहिर होता है कि आरुषि के माता-पिता जाग रहे थे और इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे थे और वे आरुषि के कमरे में हो रही घटनाओं के बारे में जान रहे थे।

बता दें कि नोएडा के जलवायु विहार में रहने वाली महज 14 साल की नाबालिग लड़की आरुषि तलवार की 15 रात-16 मई, 2008 की आधी रात को हत्या कर दी गई थी। कुछ घंटों बाद पता चला कि उसी घर में काम कर रहे नौकर हेमराज (45) का भी मर्डर हो गया है। फिर यह मामला डबल मर्डर में तब्दील हो गया। हालांकि, आरुषि के पिता ने आरुषि को मारने का आरोप घर के नौकर हेमराज पर लगाते हुए मामला पुलिस थाने मे दर्ज कराया था।

जांच के दौरान पहले ही दिन से इस मामले में एक-एक कर इतने नाटकीय घटनाक्रम सामने आए कि पूरा मामला क्रिसी थ्रिलर फिल्म जैसा हो गया। सबसे पहले हत्या के तुरंत बाद घर के नौकर हेमराज पर जाहिर किया गया, लेकिन अगले दिन जब हेमराज की लाश घर की छत पर मिली तो ये पूरा मामला घूम गया।

जांच में सीबीआइ के मुताबिक, आरुषि और हेमराज का हत्यारा कोई बाहरी व्यक्ति नहीं था। उन्होंने कहा कि हेमराज का शव आरूषि के कमरे से खींचकर छत पर लाया गया। जहां इसे एक कूलर पैनल से ढंककर रखा गया था और छत को जाने वाले दरवाजे पर ताला लगा था।

इस रहस्यमय हत्याकांड में गाजियाबाद की विशेष सीबीआइ ने 26 नवंबर, 2013 को राजेश और नूपुर तलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तलवार दंपती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने वर्ष 2017 में आरुषि-हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपती को बरी कर दिया था।

By JP Yadav