नई दिल्‍ली, जेएनएन।  Earthquake in Delhi-NCR : मंगलवार शाम दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई स्थानों पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल के डढ़ेलधुरा गांव के पास बताया जा रहा है। इसकी गहराई दस किलोमीटर और रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 5 मापी गई। आपदा नियंत्रण केंद्र के मुताबिक फिलहाल कहीं से किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है। वहीं इसका असर दिल्ली-एनसीआर में भी दिखा। यहां भी किसी भी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है। उप्र के कई जिलों में भी झटके महसूस किए गए। 

मंगलवार शाम सात बजे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भूकंप के तेज झटके से लोग घबरा गए। दहशतजदा लोग फौरन घरों से बाहर की ओर भागे। बार-बार डोल रही धरती से लोग डरे हुए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार भूकंप की तीव्रता 5 मैग्नीट्यूड थी और इसका केंद्र नेपाल था। जमीन की सतह से इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। इससे नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, बागेवश्र में भी झटके महसूस किए गए। पिथौरागढ़ आपदा कंट्रोल रूम के मुताबिक भूकंप शाम 7.01 मिनट पर आया। गौरतलब है कि इससे पूर्व 11 नवंबर को भी सीमांत जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। जिससे मुनस्यारी तहसील के कुछ मकानों में दरारें आ गई थी। इसका केंद्र पिथौरागढ़ के नाचनी व बांसबगड़ बताया गया था। 

वहीं सोमवार को गुजरात के कुछ जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इस भूकंप की रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.3 मापी गई। इसका भूकंप का केंद्र भचाऊ के पास था।  हालांकि इस भूकंप में किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई थी। इससे पहले पाकिस्‍तान के पीओके में बड़ा भूकंप आया था, जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई थी और काफी संख्‍या में सड़कें क्षतिग्रस्‍त हो गई थीं और लोगों के घर टूट गए थे।   

 2015 में नेपाल में आए भूकंप की वजह से भारी तबाही हुई थी। इस भूकंप के कारण आठ हजार लोगों की मौत हो गई थी। नेपाल को इस भूकंप में लोगों के घरों, मंदिरों को काफी क्षति हुई थी।   

दिल्‍ली एनसीआर में आया बड़ा भूकंप तो होगा बड़ा नुकसान 

हिमालय के करीब होने की वजह से दिल्ली को भूकंपीय क्षेत्र के जोन चार में रखा गया है। ऐसे में अगर हिमालयी इलाकों में भीषण भूकंप आया तो दिल्ली के लिए संभल पाना मुश्किल होगा।  इसमें एनसीआर के इलाके भी शामिल है। विशेषज्ञों की मानें तो दिल्ली में अगर बड़ा भूकंप आया तो जान माल का ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि पूर्वी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली के साथ ज्यादातर इलाके घनी आबादी वाले हैं। कई इलाके तो ऐसे भी हैं, जहां आपात स्थिति में मदद तक नहीं पहुंच सकती है।

 

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