नई दिल्ली [राहुल मानव]। महाराष्ट्र राज्य के आइआइटी बॉम्बे (Indian Institute of Technology Bombay) के छात्रों ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (Central Reserve Police Force) के जवानों के लिए एक ऐसी डेढ़ लीटर की बोतल तैयार की है, जिसमें फिल्टर लगा है और उसकी मदद से जंगल में या अन्य जगहों पर मौजूद तालाबों व नदियों के पानी को साफ किया जा सकता है। फिल्टर को तालाब या नदी में एक मीटर की दूरी से फेंकने पर यह दो से तीन मिनट के अंदर बोतल में साफ पानी पहुंचा देगा।

सीआरपीएफ को प्रदान की जाएंगी बोतलें

संस्थान के इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर स्कूल ऑफ डिजाइन के प्रोजेक्ट मैनेजर आशीष थुलकर ने दिल्ली में बताया कि कई शोध कार्यों के बाद यह बोतल तैयार की गई है। जल्द ही 800 बोतलें सीआरपीएफ को प्रदान की जाएंगी। जवानों ने बताया था कि उन्हें ऐसी बोतल चाहिए जिससे कि यदि वे नक्सल इलाके या जंगल में मौजूद हों तो छिपते हुए वह प्राकृतिक वातावरण में मौजूद पानी को फिल्टर करके पी सकें।

अभी मौजूदा परिस्थितियों में जवानों को खराब पानी तक पीने की नौबत आती है। ऐसे में इस बोतल में मौजूद फिल्टर को नदी व तालाब में डेढ़ मीटर की दूरी से डालकर पानी 2 से 3 मिनट में ही फिल्टर होकर बोतल में भर जाएगा और पीने योग्य होगा। बोतल के अंदर ही यह फिल्टर लगाया गया है।

काफी मजबूत है बोतल

इस बोतल के बाहर के मेटेरियल को पॉली कार्बोनेट से तैयार किया गया है। यह काफी मजबूत है। इस बोतल के प्रशिक्षण के दौरान तीन बोतल सीआरपीएफ के जवानों को दी गई थी। तब इसका आकार थोड़ा छोटा था।जिसे बढ़ा करने के लिए भी जवानों ने हमसे कहा था कि वह भारी बोतल को साथ में ले जाने में सक्षम हैं। इसके बाद हमारी तरफ से बोतल को बढ़ा किया गया।

आम लोगों के लिए हो सकता है फायदेमंद

दुनिया भर के तमाम देशों के साथ भारत में भी पेयजल उपलब्धता की समस्या बड़ी बनती जा रही है। शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने के चलते देश में हर साल लाखों लोग की मौत हो जाती है। तमाम राज्य सरकारों के साथ केंद्र सरकार भी पेय जल के लिए कई तरह के अभियान चला रही है। अभी हाल ही में देशभर में कई स्थानों पर पेयजल को लेकर बेहद खराब रिपोर्ट आई है। दिल्ली में ही कई स्थानों पर पानी पीने लायक नहीं है। ऐसे में छात्रों की यह उपलब्धि एक बेहतर विकल्प बन सकती है। 

भारत में 9.7 करोड़ रुपये पेयजल से महरूम

देश में पेयजल का संकट कई तरह से व्यापक स्तर पर है। देश की राजधानी दिल्ली के पास पेयजल के कोई स्थाई साधन नहीं हैं, बल्कि वह पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश पर निर्भर है। व्यापक स्तर पर बात करें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) का एक आकड़ा बताता है कि भारत में तकरीबन 9.7 करोड़ लोग साफ पानी के लिए मोहताज हैं। ऐसी स्थिति में वे गंदा पानी पीने के साथ बीमार होने और मौत के मुंह में जाने के लिए मजबूर हैं।

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Edited By: JP Yadav