नई दिल्ली, अमित तिवारी। स्मार्टफोन और एप्स का संबंध किसी से छुपा नहीं है। आज की तारीख में स्मार्टफोन रखने वाला लगभग हर व्यक्ति एप यानी एप्लीकेशन से परिचित है। स्मार्टफोन की हर खूबी इन्हीं एप पर निर्भर करती है। कॉल मिलाने से लेकर गाने सुनने और तस्वीरें खींचने तक, सब कुछ किसी ना किसी एप की ही मदद से होता है। आपने अपने आसपास कुछ ऐसे लोगों को भी देखा होगा, जिनके मोबाइल में ढेरों ऐसे एप इंस्टॉल होते हैं, जिनका आपने नाम भी नहीं सुना होता।

स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल ने अपने समानांतर एप का भी एक कारोबार खड़ा कर दिया है। इस समय आपके स्मार्टफोन में इस्तेमाल हो सकने वाले अनगिनत एप हैं। ज्यादातर एप्स की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इन्हें अपने फोन में इंस्टॉल करने के लिए आपको कोई कीमत नहीं चुकानी पड़ती। वाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे एप्स निसंदेह भरोसेमंद हैं। लेकिन यूं ही किसी अनजान और गैरजरूरी एप से बचे रहना ही आपकी स्मार्टनेस है।

मुफ्त होना ही सबसे बड़ा खतरा

स्मार्टफोन एप का मुफ्त होना ही उनसे जुड़ा सबसे बड़ा खतरा है। जब किसी एप को इंस्टॉल करने के लिए कोई कीमत नहीं चुकानी होती, तो बहुत से लोग बिना कुछ खास विचार के ही उसे इंस्टॉल कर लेते हैं। बिना विचारे होने वाले इसी इंस्टॉलेशन में खतरा छुपा है, क्योंकि हमें इस बात को कभी नहीं भूलना चाहिए कि टेक्नोलॉजी की दुनिया में कुछ भी मुफ्त नहीं होता। कोई एप जो बिना कुछ लिए आपको कोई सुविधा देता है, असल में वह भी आपसे कुछ कीमत जरूर लेता है। कीमत आपको पता नहीं होती, इसलिए खतरा ज्यादा बड़ा हो जाता है।

क्या है खतरा?

मुफ्त एप्स के बदले में चुकाए जाने वाली कीमत आप खुद हैं। चौंकिए मत! यही सच है। ज्यादातर एप इंस्टॉलेशन के बदले में आपका डाटा चुराते हैं। डाटा में आपका नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी जानकारियां शामिल होती हैं। इतना ही नहीं, जाने-अनजाने आप अपने दोस्तों की जानकारी भी ऐसे एप्स के हवाले कर देते हैं। बहुत से एप्स ऐसे भी हैं जो आपका फोन बुक पढ़ने की परमीशन मांगते हैं। ऐसा करते ही आप उन्हें आसानी से अपने दोस्तों का नाम और नंबर दे देते हैं।

इस डाटा का इस्तेमाल मार्केटिंग में होता है। कई बार आपके साथ भी ऐसा होता है, जब किसी ऐसे एप या वेबसाइट की ओर से आपको मैसेज आता है, जिसका आपने कभी प्रयोग नहीं किया हो। उनमें अक्सर आपके किसी दोस्त का नाम लिखा होता है। कई बार आपके खाते में कुछ पैसे जमा कराने की बात होती है, तो कभी सीधे आपको उस एप से जुड़ने के लिए बुलाया जाता है।

बचना बहुत मुश्किल नहीं

आपके स्मार्टफोन में कई एप कंपनी की तरफ से प्री-इंस्टॉल होते हैं। फोन लेते ही पहले आपको ऐसे एप की पहचान करनी चाहिए, जिनका आपके लिए महत्व नहीं है। उन एप्स को फोन से अनइंस्टॉल कर दीजिए। जो एप्स गैर-जरूरी हैं और अनइंस्टॉल नहीं हो सकते, उनका अपडेट अनइंस्टॉल कर देना चाहिए और कभी ओपन करने से बचना चाहिए। फोन में पहले से मिले एप्स के अलावा किसी एप को इंस्टॉल करने से पहले यह जरूर सोच लेना चाहिए कि उसकी आपको जरूरत है या नहीं। सिर्फ कुछ कूपन और कैशबैक की लालच में अनजाने एप को इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।

यह भी ध्यान रखें कि एप अपने एप-स्टोर से ही डाउनलोड करें। एंड्रॉयड फोन के प्ले-स्टोर से या आइफोन के एप-स्टोर से किसी एप को इंस्टॉल करते हुए आप वायरस के खतरों से बचने की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन किसी विज्ञापन पर क्लिक करके थर्ट पार्टी एप इंस्टॉल करना आपको ज्यादा भारी पड़ सकता है। ऐसे में आपकी गोपनीयता पर खतरा हो सकता है। एप आपके फोन से जानकारियां भी चुरा सकते हैं।

Posted By: Sanjay Pokhriyal