यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 30, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ट्विन टावरों को गिराने के लिए सुपरटेक को और समय देने से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार
दिल्ली से सटे नोएडा में उसकी एमरल्ड कोर्ट परियोजना की ट्विन टावरों को गिराने और फ्लैट खरीदारों को मुआवजे का ...और पढ़ें

नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुपरटेक लिमिटेड की उस नई याचिका को खारिज कर दिया जिसमें नोएडा में उसकी एमरल्ड कोर्ट परियोजना की ट्विन टावरों को गिराने और फ्लैट खरीदारों को मुआवजे का भुगतान करने के लिए और समय देने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसके फैसले के मद्देनजर नई याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा कि फैसला सुनाए जाने के बाद वह विविध आवेदनों पर सुनवाई नहीं कर सकती और न ही किसी तरह का समय विस्तार दे सकती है। पीठ ने कहा, 'आपको उन्हें भुगतान करना होगा।'
सुपरटेक लिमिटेड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पराग त्रिपाठी ने कहा कि वह भी याचिका तैयार किए जाने के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं और दीवाली की छुट्टियों के बाद मामले पर सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि टावरों को गिराने और फ्लैट खरीदारों को मुआवजे के भुगतान के कोर्ट के निर्देश को कार्यान्वित करने के लिए उन्हें कुछ समय की जरूरत है। इस पर पीठ ने कहा कि कंपनी को आदेश में उल्लिखित राशि का भुगतान करना ही होगा। इसके बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी।
इससे पहले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुपरटेक के 915 फ्लैट और दुकानों वाले 40 मंजिला दो टावरों का निर्माण नोएडा प्राधिकरण के साथ साठगांठ कर किया गया है। पीठ ने कहा था कि दो टावरों को नोएडा प्राधिकरण और विशेषज्ञ एजेंसी की निगरानी में तीन माह के भीतर गिराया जाए और इसका पूरा खर्च सुपरटेक लिमिटेड को उठाना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि घर खरीदारों का पूरा पैसा बुकिंग के समय से लेकर 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाया जाए। साथ ही रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन को दो टावरों के निर्माण से हुई परेशानी के लिए दो करोड़ रुपये का भुगतान किया जाए।
