नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। निर्भया के दोषियों के खिलाफ शुक्रवार को जारी नया डेथ वारंट देर शाम तिहाड़ जेल पहुंच गया। दिल्‍ली की पटियाला कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी किया है। नए डेथ वारंट के अनुसार चारों दोषियों को 1 फरवरी, सुबह 6 बजे फांसी दी जाएगी। इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने 22 जनवरी के लिए डेथ वारंट किया था। इससे कुछ देर पहले ही दोषी पवन से उसकी दादी, बहन व पिता ने मुलाकात की, जो करीब आधा घंटे चली।

जेल संख्या तीन में ले जाए जाने के बाद किसी दोषी की परिजनों से पहली मुलाकात है। बताते हैं कि यहां दोषियों को नींद नहीं आ रही है। वे बार-बार पुरानी जेल में ले जाए जाने की मांग कर रहे हैं। जेल अधिकारी लगातार इन पर नजर रखे हुए हैं। बीच-बीच में आकर इनसे बातचीत करते रहे।

फांसी या फांसी घर के बारे में बातचीत की मनाही

सूत्रों का कहना है कि दोषियों को ऐसे सेल में रखा गया है जहां से फांसी घर नजर नहीं आता है। हालांकि सेल और फांसी घर के बीच की दूरी बहुत कम है। प्रशासन ऐसा मान रहा है कि यदि फांसी घर इन्हें दिखेगा तो इनके भीतर भय के कारण तनाव हो सकता है। सुरक्षाकर्मियों को हिदायत दी गई है कि दोषियों से फांसी से जुड़े उनके किसी भी सवाल का जवाब न दें।

दोषियों के स्वास्थ्य जांच को गठित होगा मेडिकल बोर्ड

दोषियों की स्वास्थ्य जांच के लिए जल्द ही मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। जेल संख्या तीन में स्थानांतरित किए जाने के बाद उनकी स्वास्थ्य जांच रोजाना हो रही है। काउंसिलिंग भी की जा रही है। जेल संख्या तीन में ही तिहाड़ का केंद्रीय अस्पताल भी है। जल्द ही यहां एक वार्ड आरक्षित कर दिया जाएगा ताकि यदि किसी दोषी की तबीयत खराब हो तो उसे भर्ती किया जा सके। वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि इन पर नजर रखी जा सके। हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सभी दोषियों की तबीयत पूरी तरह ठीक है। शुक्रवार को चिकित्सकों ने दोषियों की जांच उनके सेल में ही जाकर की।

नहीं जाहिर की कोई इच्छा

जेल सूत्रों का कहना है कि अभी तक दोषियों ने कोई किताब या धार्मिक पुस्तक उपलब्ध कराने की कोई इच्छा जाहिर नहीं की है। प्रशासन का कहना है कि यदि वे इस तरह की कोई इच्छा जाहिर करते हैं तो ध्यान दिया जाएगा।

जानिये क्‍या था निर्भया केस   

16 दिसंबर को पैरा मेडिकल की छात्रा निर्भया के साथ दक्षिण दिल्ली के वंसत विहार इलाके में चलती बस में दरिंदगी हुई थी। मिली जानकारी के मुताबिक, बस में मौजूद ड्राइवर राम सिंह, एक नाबालिग के अलावा अक्षय सिंह कुमार, विनय कुमार शर्मा, पवन कुमार गुप्ता और मुकेश सिंह ने निर्भया के साथ दरिंदगी की थी। इसी के साथ निर्भया को मानसिक और शारीरिक कष्ट इस कदर दिया कि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।  

इसके बाद पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ गई और पूरे देश में प्रदर्शन हुए। इसको देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चला था। पहले निचली अदालत, फिर दिल्ली हाईकोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों अक्षय, मुकेश, पवन और विनय की फांसी पर मुहर लगाई, वहीं, राम सिंह ने जेल में ही फांसी लगाकर जान दे दी थी तो अन्य नाबालिग जुवेनाइल कोर्ट में सजा पूरी कर चुका है। 

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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