नई दिल्ली, राहुल मानव। अंतरिक्ष में विभिन्न मामलों पर अध्ययन करने के लिए देश में तैयार 45 मीटर ऊंचे टेलिस्कोप को लेह से 200 किलोमीटर दूर हानले में स्थापित किया गया है। इस टेलिस्कोप को भाभा परमाणु अंसुधान केंद्र (बीएआरसी) में तैयार किया गया है। भारत में निर्मित इस टेलिस्कोप के डिजाइन को बीएआरसी के साथ मिलकर तीन अन्य एजेंसियों ने भी तैयार किया है।

इसमें बेंगलुरु के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एस्ट्रोपिजिक्स, मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के नाम शामिल हैं। साथ ही इसके उद्योग पार्टनर इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआइएल) है। इसे ईसीआइएल ने लद्दाख स्थित हानले में स्थापित किया गया है। बीएआरसी के वैज्ञानिक अधिकारी निलेय भट्ट ने गुरुवार को नेशनल साइंस सेंटर में वैश्विक मेगा विज्ञान प्रदर्शनी-विज्ञान समागम की प्रेसवार्ता में इस टेलिस्कोप के बारे में जानकारी दी। यह प्रदर्शनी नेशनल साइंस सेंटर में 21 जनवरी से 20 मार्च 2020 के दौरान आयोजित होगी। 

क्या है टेलिस्कोप की खासियत

निलेय भटट् ने बताया कि इस टेलिस्कोप की मदद से गामा-रे को देख सकेंगे और इस पर एवं अंतरिक्ष के विभिन्न मामलों पर अध्ययन कर सकेंगे। इसे 356 छोटे शीशों से तैयार किया गया है। इसके नीचे एक कैमरा फिट है। शीशे में लगे रिफ्लेक्टर की मदद से अंतरिक्ष में मौजूद तस्वीरें कैमरे पर कैद हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि गामा-रे एक सामान्य प्रकार की रोशनी (लाइट) होती है, लेकिन इसकी शक्ति बहुत ज्यादा होती है। इसे बिना टेलिस्कोप के नहीं देखा जा सकता है। इसकी चौड़ाई 21 मीटर है और ऊंचाई 45 मीटर है। इसकी मदद से 10 लाख प्रकाश वर्ष दूर तक अंतरिक्ष में देखा जा सकेगा। एक सेंकेंड की रफ्तार 3 लाख किलोमीटर तक जाती है। वहीं, एक प्रकाश वर्ष में एक वर्ष के अंदर 10 हजार करोड़ किलोमीटर की दूरी तक रोशनी जाती है।  

 

शिक्षण संस्थानों के छात्र भी ले सकते हैं टेलिस्कोप का लाभ

निलेय भट्ट ने बताया कि एक महीने पहले ही इस टेलिस्कोप की स्थापना हुई है। देशभर के शिक्षण संस्थानों के छात्र भी इसका लाभ ले सकते हैं। जल्द ही शिक्षण संस्थानों को भी पत्र लिखा जाएगा, ताकि उनके छात्र इस टेलिस्कोप को देख सकें।

Posted By: Tilak Raj

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