नई दिल्ली, पीटीआइ। आइआइटी कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले छात्रों के बीच आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को रोकने की कवायद शुरू कर दी गई है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने नाबालिगों के लिए बने छात्रावासों के लिए दिशा-निर्देश का मसौदा तैयार किया है। इसे 10 दिनों के लिए सार्वजनिक किया गया है, ताकि सभी पक्षकार इस पर अपनी राय रख सकें। इसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

मसौदे में छात्रावासों के लिए सक्षम संस्था के समक्ष पंजीकरण कराना और अधीक्षक की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा छात्रों से मासिक/त्रैमासिक स्तर पर शुल्क वसूलने की व्यवस्था भी की गई है। आयोग का मानना है कि कोचिंग संस्थानों द्वारा सालाना शुल्क वसूली की मौजूदा व्यवस्था के चलते बच्चों के अभिभावकों को मोटी रकम जमा करानी पड़ती है। ऐसे में छात्र बीच में कोचिंग सेंटर नहीं छोड़ पाते हैं। ऐसे में दबाव में वे आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं।

दिशा-निर्देश अमल में आने पर यह कोचिंग संस्थानों, निजी और सरकारी स्कूलों, मदरसा, आश्रम शाला या आदिवासी बच्चों के स्कूलों पर लागू होगा। छात्रावास अधीक्षक को हलफनामा भी दाखिल करना पड़ेगा कि उसे बच्चों से जुड़े किसी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया है।

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Posted By: Tilak Raj

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