सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार, गृह मंत्री अमित शाह ने दिए 25 साल का रोडमैप तैयार करने के निर्देश
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) अब बैंकों के साथ मिलकर सहकारी समितियों को अधिक वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, जिससे छोटे ...और पढ़ें

एनसीडीसी बढ़ाएगा सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता।
HighLights
एनसीडीसी बढ़ाएगा सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता।
छोटे किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा कर्ज।
अमित शाह ने 25 वर्षीय योजना बनाने के दिए निर्देश।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) अब सहकारी समितियों को ज्यादा पैसा देने के साथ बैंकों के साथ मिलकर वित्तपोषण की नई व्यवस्था बनाने की तैयारी में है। इसके लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को निगम की 93वीं महापरिषद की बैठक में अगले 25 वर्षों की योजना बनाने और वित्तीय मदद का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए, जिसके बाद छोटे किसानों, पशुपालकों, मछुआरों एवं ग्रामीण महिलाओं को कारोबार बढ़ाने के लिए कर्ज मिलने की राह आसान हो सकती है।
अमित शाह ने एनसीडीसी को नाबार्ड, राज्य सहकारी बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों के साथ मिलकर कर्ज देने के माडल पर काम करने को कहा है। इसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के लिए अधिक पैसा जुटाने एवं वित्तपोषण की क्षमता बढ़ाना है। खासकर डेयरी जैसे कारोबार में पशु खरीदने, दूध संग्रह केंद्र बनाने, प्रसंस्करण और बाजार तक उत्पाद पहुंचाने के लिए लगातार पूंजी की जरूरत होती है।
बैंकों और एनसीडीसी के बीच बेहतर तालमेल से ऐसी परियोजनाओं को मदद मिल सकती है। किसानों को वास्तविक लाभ तभी होगा, जब कर्ज की प्रक्रिया सरल हो, ब्याज और शर्तें उनके अनुकूल हों तथा भुगतान में अनावश्यक देरी न हो।
अमित शाह ने कहा कि एनसीडीसी के वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में निगम का कामकाज तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2020-21 में जहां उसने 24,733 करोड़ रुपये बांटे थे, वहीं 2025-26 में यह रकम बढ़कर 1.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई। यानी पांच साल में करीब पांच गुना बढ़ा है। अलग सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद से अभी तक निगम 4.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता बांट चुका है।
अब चुनौती इस रकम को छोटे किसानों, पशुपालकों और कमजोर वर्गों तक पहुंचाने की है, जिन्हें अक्सर कारोबार के लिए कर्ज जुटाने में कठिनाई होती है।सहकारी संस्थाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एनसीडीसी की सहकार नवाचार योजना महत्वपूर्ण है। इसके तहत पात्र सहकारी संस्थाओं को अधिकतम 25 लाख रुपये तक की शत-प्रतिशत अनुदान सहायता देने का प्रविधान है।
योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का शुरुआती कोष बनाया गया है। इसमें 20 प्रतिशत राशि पूर्वोत्तर, पहाड़ी क्षेत्रों और कमजोर वर्गों की सहकारी संस्थाओं के लिए आरक्षित है। अब तक पांच संस्थाओं को कुल 85 लाख रुपये की सहायता मंजूर की गई है।
डिजिटल लेखांकन, वित्तीय प्रबंधन, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ने में भी मदद देने का प्रावधान है।एनसीडीसी ने 2025-26 में 1,475 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। उसकी ऋण वसूली दर 99.84 प्रतिशत रही। शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (नेट एनपीए) शून्य रही।
यह उसकी वित्तीय स्थिति का संकेत है। अमित शाह ने वित्तीय सहायता का लक्ष्य बढ़ाने के साथ निगम की कार्यप्रणाली को पेशेवर बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने युवाओं को सहकारी संस्थाओं से जोड़ने और बनास डेयरी के सफल प्रबंधन से सीख लेने का सुझाव दिया।
