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'नालायक नेता ने राष्ट्रपति को सड़क की लड़ाई में घसीटा', BJP का राहुल गांधी पर बड़ा हमला

Published: Sat, 10 Oct 2026 04:25 PM (IST)

बीजेपी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के बयानों को लेकर उन्हें 'नालायक नेता' करार दिया है।

HighLights

  1. बीजेपी ने राहुल गांधी को 'नालायक नेता' करार दिया।

  2. राहुल पर राष्ट्रपति को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप।

  3. संबित पात्रा ने राहुल को सबूत पेश करने की चुनौती दी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को राहुल गांधी को 'नालायक नेता' कहा। यह INDI गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ हुई बैठक के बाद उनके बयानों पर की गई।

पार्टी ने विपक्ष के नेता पर बातचीत को गलत तरीके से पेश करने और कथित 'वोट चोरी' के राजनीतिक विवाद में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को घसीटने का आरोप लगाया।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी को उस दावे पर सवाल उठाया कि राष्ट्रपति ने चुनावी गड़बड़ी के विपक्ष के आरोपों से इनकार नहीं किया था। उन्होंने तर्क दिया कि ज्ञापन स्वीकार करने का मतलब उसकी बातों की समर्थन करना नहीं होता है।

राहुल गांधी का बयान एक नालायक नेता जैसा- संबित पात्रा

पात्रा ने कहा कि कल आपने देखा कि कुछ राजनीतिक नेता राष्ट्रपति भवन गए थे। राष्ट्रपति भवन से बाहर आने के बाद राहुल गांधी का बयान एक नालायक नेता जैसा था। उन्होंने राहुल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ गलत भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

संबित पात्रा ने कहा कि वह देश में विपक्ष के नेता हैं, लेकिन जब मैं उन्हें नालायक नेता कहता हूं, तो इसकी वजह यह है कि पूरे देश ने देश देखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ किस तरह की अपशब्दों वाली भाषा का इस्तेमाल किया और पीएम के खिलाफ किस तरह का झूठ फैलाया। देश ने भारत के संवैधानिक पदों और संस्थाओं के खिलाफ आपको द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को भी देखा है।

राष्ट्रपति को उस अराजकता में घसीटने की कोशिश- संबित पात्रा

राहुल गांधी को अराजकतावादी बताते हुए BJP प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि विपक्ष एक संवैधानिक बातचीत को राजनीतिक टकराव में बदलने की कोशिश कर रहा था। पात्रा ने कहा कि अराजकतावादी राहुल गांधी ने भारत की राष्ट्रपति को उस अराजकता में घसीटने की कोशिश की जिसे वे भारत की सड़कों पर फैलाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को राजनीतिक सड़क-संघर्षों में घसीटने की कोई मिसाल नहीं रही है। बैठक के बारे में विपक्ष के दावों पर सवाल उठाते हुए पात्रा ने कहा कि ज्ञापन स्वीकार करना स्थापित संवैधानिक प्रोटोकॉल का हिस्सा था और इसका मतलब उसके आरोपों का समर्थन करना नहीं था।

उन्होंने उसे पेश क्यों नहीं किया- संबित पात्रा

साथ ही, वे यह भी दावा करते हैं कि राष्ट्रपति ने उनका ज्ञापन स्वीकार किया और उनके आरोपों को माना, जबकि यह भी कहते हैं कि उन्होंने सबूत देने को कहा। वे सबूत साथ क्यों नहीं ले गए? उन्होंने उसे पेश क्यों नहीं किया?”

पात्रा ने विपक्ष को भारत के चुनाव आयोग (ECI) के सामने सबूत पेश करने की चुनौती भी दी और पूछा कि जब चुनाव आयोग आपको पेश होने और सबूत देने के लिए बुलाता है, तो आप क्यों नहीं जाते?

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