अयोध्या, जेएनएन। मुस्लिमों ने संतों के साथ मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। संकल्प मंदिर आंदोलन के अग्रदूत रामचंद्रदास परमहंस की सरयू तट स्थित समाधि पर लिया गया। संकल्पसभा का संयोजन बब्लू खान ने किया। उन्होंने कहा कि सच्चे मुसलमान को विवादित ढांचा ध्वंस का कोई अफसोस नहीं है। इस ढांचे का निर्माण मंदिर तोड़कर कराया गया था और आक्रांता बाबर का यह कृत्य इस्लाम को कलंकित करने वाला है। ऐसे में ढांचा ध्वंस होना इस्लाम के माथे पर लगे कलंक का मिटना था और मंदिर निर्माण में सहयोग देकर मुस्लिम यह साबित करे कि वह बाबर नहीं इमामे हिंदू भगवान राम का अनुयायी है।

इस अवसर पर दशरथगद्दी के महंत बृजमोहनदास ने कहा कि राममंदिर राष्ट्रीय एकता की कसौटी है और रहीम-रसखान से लेकर एपीजे अब्दुल कलाम की परंपरा आगे बढ़ा रहे बब्लू खान जैसे मुस्लिमों के रहते यह विश्वास प्रबल होता है कि राममंदिर व राष्ट्र मंदिर परस्पर पूरक हैं। दोनों की बुनियाद साथ-साथ मजबूत हो रही है।

हनुमानगढ़ी से जुड़े महंत बलरामदास ने कहा कि भगवान राम मानवता के पर्याय हैं और मर्यादा इसी में है कि उनका मंदिर आपसी सहमति से बने। इससे पूर्व श्रीमहंत रामचंद्रदास सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य नारायण मिश्र ने बब्लू खान और उनके सहयोगी मुस्लिमों का स्वागत किया तथा अपने गुरु परमहंस को याद करते हुए कहा कि वह मंदिर निर्माण के साथ रहीम- रसखान की परंपरा के प्रबल हिमायती थे। मंदिर निर्माण का संकल्प लेने वालों में खालिद अहमद, मो. मेहंदी, नजर अब्बास, कासिम अली व अदनान खान आदि भी शामिल रहे।

 

Posted By: Tanisk

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